फ़ेसबुक पर कमेंट, नौकरी पर ख़तरा?

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Image caption दो युवतियों की गिरफ़्तारी के बाद, एयर इंडिया कर्मियों का मामला लोगों के सामने आया.

फ़ेसबुक, ट्विटर दोस्तों, रिश्तेदारों और परिचितों से जुड़े रहने का साधन बन सकते हैं, या आपकी मनोभावनाओं को व्यक्त करने का ज़रिया भी, लेकिन सावधान रहें कि कहीं सोशल मीडिया वेबसाइट आपके रोज़गार की संभावनाओं में रूकावट न बन जाएं.

पिछले साल सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया के दो कर्मचारियों के निलंबन का मामला सामने आया जिन्हें बारह दिनों की पुलिस हिरासत काटनी पड़ी थी क्योंकि उन्होंने फ़ेसबुक पर कुछ कमेंट पोस्ट किए थे.

पुलिस का कहना था कि उन्होंने अपने पोस्ट में कुछ राजनितिज्ञों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर अपमानजनक टिपण्णियां डाली थीं.

विरोध-प्रदर्शन

ख़बरों के मुताबिक़ उनमें से एक - केवीजे राव का कहना था कि पुलिस ने ऐसा महाराष्ट्र सरकार में मौजूद एक राजनीतिक पार्टी के सदस्य के दबाव में किया था.

भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर हुकूमत ने दो शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया. ये दो लोग उन तीन व्यक्तियों में शामिल थे जिन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक पर इस्लाम-विरोधी कमेंट पोस्ट किए थे.

इस मामले में राज्य के मुस्लिम नागरिकों ने प्रदर्शन भी कए थे. उनका कहना था कि ये लोग उनके धर्म के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहे थे.

इस मामले पर किश्तवाड़, डोडा और भदेरवा ज़िले में प्रदर्शनकारियों और तीनों लोगों के रिश्तेदारों के बीच मामूली झड़पें भी हुई थीं.

बाल ठाकरे

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट के कई हिस्सों पर सवाल उठाया है.

हिंदूवादी नेता और शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे की मौत के बाद फ़ेसबुक पर किए गए कमेंट के चलते दो युवतियों की गिरफ़्तारी का मामला तो लोग शायद भूले भी नहीं हैं.

दोनों में से एक ने बाल ठाकरे की मौत के बाद मुंबई बंद पर सवाल उठाया था जबकि दूसरे ने इसे 'लाइक' किया था.

यह मामला मुंबई से सटे ठाणे ज़िले के पालघर का है. इस लड़की के खिलाफ़ धारा 295ए के तहत मामला दर्ज़ किया गया है जो गलत मंशा से किसी के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित है.

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी पर लगा देशद्रोह का मुक़दमा और गिरफ़्तारी या फिर जाधवपुर विश्विद्यालय के प्रोफेसर की गिरफ़्तारी के मामले का नौकरी से कोई संबंध नहीं है लेकिन जानकारों का मानना है कि वैसे लोगों को सोशल वेबसाइट्स पर कमेंट डालने से पहले एहतियात बरतनी चाहिए.

मानव-संसाधन

ग़ैर सरकारी कंपनियों के मानव संसाधन विभाग उम्मीदवारों को चुनने के लिए सोशल नेटवर्किग साइट्स का सहारा बड़े पैमाने पर ले रहे हैं.

कई बार तो वैसे उम्मीदवार जो इन साइट्स पर मौजूद नहीं हैं, उस शॉर्टलिस्ट का हिस्सा भी नहीं बन पाते जो मानव संसाधन विभाग तैयार करते हैं.

क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि जब वो उम्मीदवारों का चुनाव करते हैं तो सोशल वेबसाइट पर मुद्दों पर दिए गए राय या विचारों को भी ध्यान में रखते हैं, हालांकि महज़ यही कमेंट चुने जाने या न चुने जाने की वजह नहीं बनते.

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