तेलंगाना के कांग्रेसी सांसद देंगे इस्तीफ़ा

तेलंगाना में कांग्रेस का संकट
Image caption तेलंगाना के मुद्दे पर कांग्रेस अंदरूनी संकट से गुजर रही है

आंध्र प्रदेश में जहां तेलंगाना राज्य की मांग पर केंद्र सरकार की टालमटोल की नीति से राजनीतिक अफरातफरी मची है, वही कांग्रेस आला कमान ने तेलंगाना क्षेत्र के अपने सांसदों को बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया है.

कांग्रेस के महासचिव वयलार रवि ने नाराज सांसदों से फ़ोन पर संपर्क किया और उन्हें बातचीत के लिए बुधवार को दिल्ली आने के लिए कहा.

सोमवार को तेलंगाना क्षेत्र के सांसदों ने अलग राज्य की घोषणा न करने पर नाराज़ होकर संसद और कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र देने की घोषणा की थी.

तेलंगाना से कांग्रेस के सात सांसदों की एक और बैठक मंगलवार को हैदराबाद में हुई जिसमें वायलार रवि के निमंत्रण पर विचार किया गया.

इस्तीफा देने पर आमादा

इन सांसदों के प्रवक्ता पोनम प्रभाकर ने बैठक के बाद घोषणा की कि इस्तीफे देने के उनके फैसले में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वो बुधवार को दिल्ली जाकर संसद और पार्टी से त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हवाले कर देंगे.

पहले इन सांसदों ने कहा था कि वे अपने इस्तीफे लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को देंगे.

पार्टी के वरिष्ट नेता केशव राव ने कहा की त्यागपत्र सोनिया गांधी को इसलिए दिए जा रहे हैं क्योंकि ये सांसद किसी निजी कारण से नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मुद्दे पर अपनी पार्टी की नीति से नाराज हो कर इस्तीफे दे रहे हैं.

एक और सांसद राजगोपाल रेड्डी ने इस बात का खंडन किया कि उनका त्यागपत्र एक नाटक है और केवल दिखावे के लिए ऐसा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हम बहुत गंभीरता के साथ यह कदम उठा रहे हैं क्योंकि अब तेलंगाना की जनता कांग्रेस की किसी बात पर विश्वास नहीं कर सकती. गृह मंत्री शिंदे और गुलाम नबी आजाद के परस्पर विरोधी बयानों से कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुंचा है और हमें बहुत कष्ट हुआ है. अब हमारे पास इसके सिवा कोई रास्ता नहीं है कि या तो तेलंगाना राज्य हासिल करें या फिर पार्टी छोड़ दें.”

कांग्रेस की मजबूरी

इन सांसदों का कहना है कि आंध्र और रायलसीमा के कांग्रेसी नेताओं के दबाव में आकर ही आला कमान ने 28 जनवरी से पहले तेलंगाना के फैसले को टाल दिया.

Image caption तेलंगाना समर्थकों का कहना है कि कांग्रेस ने उन्हें छला है

कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि पार्टी आला कमान इन सांसदों को उन कारणों से अवगत कराएगा जिनसे तेलंगाना के फैसले में देरी हुई.

सूत्रों का कहना है कि अगर इसी समय तेलंगाना की घोषणा कर दी गई तो इससे न केवल राज्य में कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी बल्कि संसद में बजट पारित करना भी मुश्किल हो जाएगा क्योंकि आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के सांसद इस्तीफा दे देंगे.

लेकिन तेलंगाना के सांसद कह रहे हैं कि वे कोई और बहाना सुनना नहीं चाहते और अगर तुरंत तेलंगाना के पक्ष में फैसला नहीं किया गया तो वे संसद और कांग्रेस छोड़ देंगे.

पोनम प्रभाकर ने कहा कि इससे पहले जब उन्होंने एफडीई के मुद्दे पर बहस के दौरान संसद का बहिष्कार किया था, तब उन्हें सर्वदलीय बैठक के नाम पर ठंडा किया गया. लेकिन अब ऐसी कोई चाल सफल होने नहीं देंगे.

कांग्रेस का बहिष्कार

इधर तेलंगाना के समर्थकों ने तेलंगाना क्षेत्र में कांग्रेस के मंत्रियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.

हैदराबाद के कृषि विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में भाग लेने आए ग्रामीण विकास मंत्री वरा प्रसाद राव को भाषण देने से रोकने पर पुलिस ने कई छात्रों को गिरफ्तार कर लिया.

वहीं नलगोंडा जिले में एक और मंत्री जाना रेड्डी के निवास स्थान का घेराव किया गया.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने "कांग्रेस को ख़त्म करो तेलंगाना हासिल करो" के नारे के साथ अपना आंदोलन और भी तेज़ करने की घोषणा की है और समर्थकों से कहा है की वे कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का बहिष्कार करें.

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