क्या है गांधी-कालेनबाख के पत्रों में?

  • 30 जनवरी 2013
Image caption 1910 में टॉलस्टॉय फार्म में महात्मा गाँधी और कालेनबाख( दूसरी पंक्ति के बीच में )का दुर्लभ चित्र

महात्मा गांधी से जुड़े सैकड़ों पत्र, दस्तावेज और फोटो दिल्ली के राष्ट्रीय अभिलेखागार में हैं.

ये दस्तावेज हरमन कालेनबाख से संबंधित हैं जो दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए महात्मा गांधी के मित्र बने थे. इन दोनों की मुलाकात 1904 में दक्षिण अफ्रीका में हुई थी. इसके बाद 1907 से अगले दो साल तक गांधी कालेनबाख के साथ ही रहने लगे थे.

महात्मा गांधी 1914 में वे दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे. इस दौरान कालेनबाख ही उनके सबसे विश्वसनीय और आत्मीय सहयोगी बने रहे.

कसरती बदन वाले कालेनबाख ने गांधी को कई 'तार्किक और प्यार भरी टिप्पणियां' भेजी थीं, कहा जाता है कि इन्हें बाद में नष्ट कर दिया गया.

उपलब्ध संग्रह अच्छी तरह संरक्षित किया हुआ और अनमोल है.

अप्रकाशित संग्रह

इस संग्रह में गांधी और कालेनबाख के बीच पांच दशकों तक हुआ पत्राचार शामिल है. दोनों के बीच 1905 से लेकर 1945 तक चिट्ठियों के ज़रिए बातचीत होती रही. इसमें बहुत सी सामग्री कभी प्रकाशित नही हुई.

इन पत्रों में गांधी और कालेनबाख ने कानूनी मामलों, रूसी लेखक टॉल्सटॉय में अपनी साझा दिलचस्पी का ज़िक्र किया गया है.

साथ ही दोनों ने दक्षिण अफ्रीका के टॉल्सटॉय फार्म में जो वक्त साथ गुजारा, उस वक्त की बातों की चर्चा की गई हैं.

इस पत्रों में गांधी की भारत वापसी, शुरुआती राजनीतिक अभियान के बारे में भी बात की है.

कस्तूरबा गाँधी के बारे में

महात्मा गाँधी ने अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के बारे में भी बातें की हैं. इन पत्रों में उन्होंनें ‘बा’ की बीमारी का भी जिक्र किया है.

महात्मा गाँधी लिखते हैं, “अब मैं अपनी पत्नी से और नाराज नही रहना चाहता क्योंकि वो बहुत ही प्यारी हैं. उन्होंने आज कुछ अंगूर खाए लेकिन फिर बीमार हो गई. मुझे लगता है कि धीरे धीरे वो ढलती जा रही हैं.

इनमें महात्मा गाँधी के भारत लौटने के दौरान उनके मनोभावों का भी पता चलता है.

महात्मा गाँधी लिखते हैं, “मैं जमीन पर बैठ कर लिखता हूँ और उंगलियों से खाना खाता हूँ, मैं भारत पहुंच कर अलग थलग नही दिखना चाहता हूँ.”

कालेनबाख ने अपनी चिट्ठियों मे यूरोप में नाज़ीवाद के प्रचार प्रसार और यहूदियों की स्थिति पर चिंता जताई है.

इन चिट्ठियों में महात्मा गाँधी के पुत्रों और सौतेले भाइयों के साथ साथ टॉल्सटॉय के अनुवादक आईएफ मेयो के पत्र भी हैं.

कालेनबाख को उपहार

टॉल्सटॉय फार्म, फलों के पेड़ की खरीद संबंधी दस्तावेज़ों के साथ साथ ऐसे दस्तावेज़ भी हैं जिनमें पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है.

महात्मा गाँधी ने कालेनबाख को कई उपहार भी भेजे थे. इन उपहारों में एक झंडा, एक सूती खादी का स्कार्फ और चरखा भी था.

इन दस्तावेजों में वो मार्मिक पत्र भी शामिल हैं जो महात्मा गांधी ने अपने पहले बेटे हरिलाल गांधी, दूसरे बेटे मणिलाल गांधी और तीसरे बेटे रामदास गांधी के आपसी संबंधों के बारे में लिखा है.

इन पत्रों से ये भी जाहिर होता है कि कालेनबाख के गांधी के दूसरे बेटे मणिलाल गांधी के साथ गहरी दोस्ती थी.

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