स्वतंत्र पत्रकारिता की पायदान पर लुढकता भारत

  • 30 जनवरी 2013
भारत
Image caption नई रिपोर्ट में भारत का स्थान 131 से फिसल कर 140 पर पहुँच चुका है.

'रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स' संस्था की ओर से प्रकाशित होने वाले सालाना प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की मानी जाए तो भारत पिछले एक दशक में अब तक की अपनी निचले पायदान पर पहुंच चुका है.

जानकारों के मुताबिक़ भारत की वरीयता में आई गिरावट के पीछे पत्रकारों के खिलाफ़ बढ़ी हिंसक वारदातें और इंटरनेट स्वतंत्रता पर सरकारी नज़र रखा जाना एक बड़ा कारण है.

जारी की गई नई रिपोर्ट में भारत का स्थान 131 से फिसल कर 140 पर पहुँच चुका है.

जबकि भारत के पड़ोसी देश चीन में भी पत्रकारों की स्वतंत्रता के नाम पर कोई ख़ास बदलाव नहीं देखने को मिले है और कुल 179 देशों की फे़हरिस्त में उसका स्थान 173वां है.

वर्ष 2013 के लिए जारी की गई इस ताज़ा सूची से पता चलता है कि जिन तीन देशों ने पिछले साल स्वतंत्र पत्रकारिता में शीर्ष स्थान प्राप्त किए थे वे अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए हैं.

यूरोप का बोलबाला

‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स' के महासचिव क्रिस्टोफ़ देलोइर के अनुसार लोकतांत्रिक देशों में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता का माहौल अभी भी ज्यादा है.

उन्होंने कहा, "प्रेस फ्रीडम में देशों की वरीयता अब सनसनीखेज़ राजनीतिक घटनाक्रमों पर ही आधारित नहीं है. इस साल का सूचकांक प्रेस और मीडिया के प्रति सरकारों का रुख दर्शाने में सफल कहा जा सकता है".

फिनलैंड ने इस बार भी शीर्ष स्थान पर अपना वर्चस्व बरकरार रखा है जबकि नीदरलैंड्स और नॉर्वे दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज़ हैं.

इस संस्था के मुताबिक़ 'अरब क्रांति' के चलते जहाँ 2012 की सालाना रिपोर्ट में काफी उतार-चढ़ाव देखे गए थे वहीँ इस साल की रिपोर्ट अनुमानों के मुताबिक़ ही लगती है.

जिन देशों में प्रेस की स्वतंत्रता सबसे निम्न स्तर पर आंकी गई है उनमे तुर्कमेनिस्तान, उत्तर कोरिया और एरिटीरिया 177, 178 और 179वें स्थान पर हैं.

'रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स' नाम की इसी संस्था ने पाकिस्तान को 2011 में लगातार दूसरे साल पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक जगह बताया था.

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