प्रधानमंत्री पद की रेस में पहला राउंड मोदी के नाम

  • 7 फरवरी 2013
Image caption बीजेपी के हल्कों में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने की मांग उठ रही है

नरेंद्र मोदी के शब्दकोश में छवि की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि वह दिल्ली की कड़कड़ाती सर्दी में भी अपने ट्रेडमार्क आधी आस्तीन के सूती कुर्ते में ही आए.

श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स के मंच पर नरेंद्र मोदी जब बोलने के लिए खड़े हुए तो उनके ज़हन में दो ही चीज़ें थी.... देश का भविष्य और स्वयं उनका अपना भविष्य.

उनको इस बात का पूरा गुमान था कि वह राहुल गाँधी की कोर कॉन्सटीट्वेंसी युवाओं से मुख़ातिब थे और वह भी उनकी अपनी ज़मीन पर.

वह भारत के तथाकथित ‘हैव नॉट्स’ को संबोधित नहीं कर रहे थे बल्कि उनका साबका देश के कुलीन माने जाने वाले शिक्षण संस्थान और उसके ‘एसपिरेशनल’ छात्रों से था. उन्होंने उनको निराश नहीं किया.

बेचने की कोशिश

लगभग एक घंटे के अपने भाषण में मोदी ने अपने आप को बेचने की भरपूर कोशिश की और उसमें बहुत हद तक वह सफल भी हुए. कॉलेज के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के विरोध के बावजूद मोदी वहाँ मौजूद लोगों को यह समझा पाने में कामयाब रहे कि भारत के युवाओं के लिए पिछली बातों की तुलना में भविष्य के सपने अधिक महत्वपूर्ण हैं.

मोदी ने जोर दे कर यह कहने की कोशिश की कि उनका एकमात्र केंद्र बिंदु विकास है और गुजरात में उनके नेतृत्व में हुए विकास मॉडल को वह पूरे देश में फलते फूलते हुए देखना चाहते हैं.

मोदी ने जानबूझ कर अपने बारे में फैली कड़वी सच्चाइयों पर सफाई देने की कोई कोशिश नहीं की. चुटीले जुमलों और किस्से कहानियों से सराबोर उनके भाषण में यह आभास जरूर मिला कि वह बार बार अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्होंने उसे परोसा कुछ दूसरे ही अंदाज़ में.

गुजरात के किसानों की पशुपालन और दुग्ध उत्पादन में उपलब्धियों का बखान उन्होंने कुछ इस अंदाज़ में किया मानो देश की व्हाइट रिवोल्यूशन के सूत्रधार कुरियन न होकर वह स्वयं हों.

वाइब्रेंट गुजरात

वाइब्रेंट गुजरात का जिक्र करते समय उन्होंने गुजरात में हुए निवेश की अपेक्षा यह बताना ज्यादा उचित समझा कि वह देश की 20 फीसदी सकल घरेलू उत्पाद के मालिकों को एक छत के नीचे जमा कर पाने में सफल रहे.

अपने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से मंत्रमुग्ध करने के प्रयास में उन्होंने न सिर्फ इस बात का ज़िक्र किया कि पूरा देश गुजरात का दूध पीता है बल्कि यह कहने से भी नहीं चूके कि देश आज से नहीं बल्कि सालों से गुजरात का नमक खाता चला आ रहा है.

मोदी भली भांति जानते हैं भारतीय संदर्भ में नमक खाने के मुहावरे को एक खास संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है.

ताईवान की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वहाँ एक साहब ने उनसे पूछा कि क्या भारत अभी भी संपेरों का देश है. मोदी का जवाब था कि भारत स्नेक चार्मर्स के देश से अब माउस चार्मर्स के देश में बदल चुका है. माउस से उनका इशारा कंप्यूटर के माउस से था.

यह साफ है कि मोदी और राहुल गांधी के बीच भारत के महत्वाकाँक्षी युवा को अपने पक्ष में करने की होड़ शुरू हो चुकी हैं और इस होड़ मे शुरुआती बढ़त नरेंद्र मोदी ने बनाई है.

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