भगवान के घर देर है अंधेर नहीं: हेमा

संसद
Image caption पीड़ितों ने विरोध में अपने पतियों को दिए गए सम्मान वापस लौटा दिए थे.

साल 2001 में संसद पर हुए हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मी जगदीश यादव की पत्नी हेमा देवी का कहना है कि सर्वोच्च न्यायलय के फैसले को माना गया है इससे न्यायालय की गरिमा ऊंची हुई है.

राजस्थान के सीकर ज़िले की रहने वाली हेमा देवी का कहना है, ''हमें इस फैसले के इंतजार में 12 साल काटने पड़े हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में ही फांसी की सज़ा सुना दी थी. लेकिन अफ़ज़ल की क्षमा याचिका के बाद मामला अटक गया. अब पता नहीं इसके पीछे क्या राजनीतिक कारण थे, ये सरकार ही जानती है.''

इस फैसले में हुई देरी पर उनका कहना है, ''शहीद आत्माओं को सच्ची श्रंदाजलि है और ये बताता है कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं.''

भारतीय संसद पर हमला 13 दिसंबर 2001 को हुआ था जिसमें 14 लोगों की जान गई थी. इनमें पाँच हमलावर शामिल थे.

संसद पर हुए हमले में मरने वालों में दिल्ली पुलिस के पांच कर्मचारियों नानक चंद, रामपाल, ओमप्रकाश, बिजेंद्र सिंह और घनश्याम के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में महिला कर्मचारी कमलेश कुमारी, संसद में सुरक्षाकर्मी जगदीश यादव और मातबर सिंह नेगी, बगीचे की देखभाल करने वाले देशराज और पत्रकार विक्रम सिंह ब्रिष्ट की भी घायल हो जाने के बाद मौत हो गई थी.

नाराज़गी

हेमा का कहना था जब मुंबई हमलों के लिए कसाब को फांसी दी गई तो हमें लगता था कि जहां संसद की कार्रवाई होती है, हमारी सरकार बैठती है , वहां हुए हमले के लिए दोषियों को फांसी क्यों नहीं दी जा रही है.

मुंबई में 26/11 के हमलों के दोषी अजमल कसाब को 2012 में पुणे की यरवडा जेल में फांसी दी गई थी.

इस हमले में कुल 166 लोग मारे गए थे और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे. इनमें कई पुलिस अधिकारी और विदेशी भी शामिल थे.

हेमा का कहना था उन्हें अपने पति की मौत पर सरकार और राज्य सरकार की तरफ से मुआवज़ा मिला लेकिन उन्होंने पति को दिए गए अशोकचक्र का सम्मान लौटा दिया था.

उन्होंने कहा, ''मैंने ये सम्मान ये कह कर लौटा दिया था कि जब तक मेरे पति को न्याय नहीं मिलेगा तब तक मैं उसे ग्रहण नहीं करुंगी.''

लेकिन अब हेमा अपने पति के सम्मान को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति को अर्जी देंगी.

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