'गिलानी की नज़रबंदी हिटलरशाही की हरकत'

जस्टिस काटजू
Image caption काटजू ने गिलानी की नज़रबंदी की तुलना हिटलरशाही से की है.

प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस काटजू ने पत्रकार इफ़्तेख़ार गिलानी के साथ हुए दिल्ली पुलिस के दुर्व्यवहार की तुलना जर्मनी के नाज़ी शासन के तौर-तरीक़ों से की है.

गिलानी ने पुलिस की बदसुलूकी के ख़िलाफ़ प्रेस काउंसिल में शिकायत की थी.

भारत सरकार के गृह सचिव के नाम लिखे पत्र में काटजू ने कहा है, ”गिलानी की शिकायत और हिंदू अख़बार में छपी ख़बर से पता चलता है कि दिल्ली पुलिस ने इफ़्तेख़ार गिलानी और उनके परिवार व छोटे बच्चों के साथ बदसुलूकी की और उनका उत्पीड़न किया.”

उन्होंने कहा, ”ये नाज़ियों के अलोकतांत्रिक और बर्बर तौर-तरीक़े हैं.”

गृह सचिव को पत्र

गृह सचिव को लिखे पत्र में काटजू ने कहा है कि अगर ये आरोप सही हैं तो इस तरह के ग़ैरक़ानूनी काम करने वाले पुलिस अफ़सरों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 341/342 और दूसरे प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए.

जस्टिस काटजू ने कहा है कि इसके साथ ही पुलिस कार्रवाई में शामिल अधिकारियों को ऐसा करने का निर्देश देने वाले आले अफ़सरों पर भी कार्रवाई की जाए.

गिलानी के आरोपों के सच साबित होने की सूरत में काटजू ने गृह सचिव को 48 घंटों के भीतर कई क़दम उठाने के लिए कहा है.

इनमें पुलिस की कार्रवाई में शामिल अफ़सरों के ख़िलाफ़ क़ानूनी क़दम उठाने और गिलानी को वाजिब मुआवज़ा दिए जाने की मांग भी शामिल है.

गिलानी की नज़रबंदी

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उन ख़बरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जिनके मुताबिक़ शनिवार को जाने-माने पत्रकार इफ़्तेख़ार गिलानी को नज़रबंद कर लिया गया था.

कश्मीरी-मूल के गिलानी को शनिवार सुबह दिल्ली में उनके घर की पार्किंग से दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारियों ने पकड़ लिया था.

वहां से उन्हें, उनके ससुर और कश्मीरी नेता सैयद अली शाह गिलानी के घर ले जाया गया जहां कई घंटों तक उन्हें नज़रबंद रखने के बाद छोड़ दिया गया.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत से जब बीबीसी हिंदी ने इस बारे में प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो उन्होंने “नो कमेंट्स” कहकर फ़ोन काट दिया.

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