'अफ़ज़ल की आख़िरी ख़्वाहिश तो बता देते'

Image caption अफ़ज़ल गुरु को शनिवार सुबह आठ बजे फांसी दे दी गई थी.

भारत के संसद पर हमले के अभियुक्त अफ़ज़ल गुरु को फांसी देने के बाद उनके शव को तिहाड़ जेल में ही दफ़्न किए जाने की बात पर अफ़ज़ल के परिवार में कड़ी नाराज़गी है.

उनके परिवार ने अफ़ज़ल की फांसी की ख़बर स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे जाने के भारत सरकार के दावे को भी बेबुनियाद बताया है.

अफ़ज़ल के चचेरे भाई यासीन गुरु ने बीबीसी को टेलिफोन पर बताया, “यह सरासर गलत और बेबुनियाद है और वे (भारत सरकार) बहुत बड़ा झूठ बोल रहे हैं. हमें उसी दिन 9 तारीख को सुबह सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट फेसबुक और टीवी से फांसी के बारे में पता चला.”

यासीन गुरु कहते हैं,“ हमने भारत सरकार से मांग की है और आज भी हम इसे दोहरा रहे हैं कि अगर आप ने हमें कोई चिठ्ठी भेजी है तो उसकी रसीद दे दें हमें और दूसरी बात यह है कि अगर किसी बंदे ने यहां रिसीव की है तो उसकी पावती तो होनी चाहिए न. लेटर तो ऐसे डेलिवर नहीं हो जाती है न”.

सरकार से मांग

आगे की योजना के बारे में पूछे जाने पर यासीन ने बताया कि हमने तीन चार कदम उठाए हैं.

उहोंने कहा,“अपने वकील से बात करके दिल्ली के जेल महकमे को चिठ्ठी लिखी है जिसमें हमने मांग की है कि हमें शव वापस कर दिया जाए.”

यासीन कहते हैं,“हमने यहां के जिला कलक्टर को एक ई-मेल किया है और कहा है कि फांसी तो आपने दे दी है लेकिन अब हमारा धार्मिक और मानवीय अधिकार भी है कि आप हमें बॉडी वापस कर दें ताकि हम इस्लामी तौर-तरीकों से शव का कफन-दफन कर सकें जो कि हर एक लाश का हक होता है.”

परिवार के हालात के बारे में पूछे जाने पर यासीन गुरु कहते हैं,“एक मिक्स अप फीलिंग है. गुस्सा भी है और दर्द भी है. गुस्सा इस लिहाज से है कि किसी इंसान की मौत हो गई है. भारत सरकार में जो बड़े बड़े अफसर हैं, जिन्होंने फांसी दी है, वे भी इनसान हैं और हम कश्मीरी भी यहां पर इनसान हैं”.

अफ़ज़ल की आखिरी ख्वाहिश

Image caption अफ़ज़ल गुरु को फांसी दिए जाने पर कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए हैं

आखिरी ख्वाहिश के सवाल पर यासीन ने कहा,“आप एक इनसान को मार रहे हो और उस इनसान का यह हक बनता है कि उसकी आखिरी ख्वाहिश जो उसकी थी, वह पता चल जाती, शायद वह अपने परिवार से मिलता, अपने बच्चे से मिलता, अपनी बीवी से मिलता या उसके दिल में कोई और बात होती तो वह कर लेता".

उन्होंने कहा,“डेढ़ दो महीने पहले तो हम लोग मिलते रहते थे और उस समय ऐसी कोई स्थिति नहीं थी कि ऐसा कुछ होने वाला है. ऐसी (आखिरी ख्वाहिश) कोई बात नहीं हुई थी”.

सरकार के प्रति नाराज़गी जाहिर करते हुए यासीन गुरु ने कहा,“आप तीन तारीख को हमारी मर्सी पिटीशन खारिज करते हैं और हमें पता नहीं चलता. मीडिया को भी कोई इत्तेला नहीं मिलती और फिर आप फांसी पर लटका देते हैं फिर भी कोई इत्तेला नहीं मिलती.”

वह कहते हैं,“आप खुद को दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी बताते हो और एक आदमी को मार रहे हो लेकिन उसके घर वालों को पता भी नहीं होता”.

कश्मीर के हालात

Image caption भारत में कई संगठनों ने अफ़ज़ल को फांसी दिए जाने पर जश्न मनाया.

अफ़ज़ल की फांसी के बाद के हालात पर यासीन ने कहा,“हम पहले भी कह चुके हैं कि हम नहीं चाहते हैं कि कोई और जान जाया हो. हम नहीं चाहते हैं कि कोई बच्चा रस्ते में शहीद हो जाए. अब्दुल साहब अब कोई गुरु खानदान का बेटा नहीं है. अब तो वह पूरी कश्मीर कौम का बेटा है.”

उन्होंने कहा,“हम सब लोगों की तरफ से कश्मीरी अवाम की तरफ से भारत सरकार को सिर्फ यही कहना चाहते हैं कि अफ़ज़ल की लाश हमें दे दी जाए. और इस्लामी तरीके से वह जिस वतन से जिस मिट्टी से वह पैदा हुआ है, उसी मिट्टी में हम उसको दफ़्न कर दें. हमारी ख्वाहिश है और भारत सरकार से हमारी यही गुजारिश है कि ऐसा हो जाए और उनकी लाश हमें दे दी जाए.”

कश्मीर के हालात पर यासीन ने कहा,“यहां पर हर गली-कूचे को नाके बंद कर दिया गया है, यहां पर कर्फ्यू लगा दी गई है, जो प्रमुख रास्ते हैं, उसको बंद कर दिया गया है, कश्मीर के हर गली-कूचे में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. जो हाल पूरे वतन का है वैसा ही हाल हमारे गांव, हमारे इलाके का भी है. यहां तो माहौल बहुत ज्यादा खराब हैं, गमोगुस्सा है हर तरफ और इसकी जिम्मेदार भारत सरकार खुद है.”

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