सहारा : होंगे बैंक खाते सील और संपत्ति की कुर्की

सहारा प्रमुख
Image caption सहारा समूह की मुश्किलें बढ़ीं

बाजार नियामक सेबी ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय और उनकी दो कंपनियों के बैंक खातों को सील करने और उनकी संपत्ति की कुर्की के आदेश दिए हैं.

ये आदेश निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने से जुड़ा है, जिस पर अमल नहीं हुआ. पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर निवेशकों का पैसा वापस नहीं किया जाता है तो सेबी सहारा समूह के बैंक खातों पर रोक लगाने और संपत्ति की कुर्की करने को स्वतंत्र है.

सहारा हाउसिंग इवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) के खिलाफ अपने दो अलग अलग आदेशों में सेबी ने कहा है कि इन दोनों कंपनियों ने बॉन्ड धारकों से 6,380 करोड़ और 19,400 करोड़ रुपए की राशि जुटाई और इसमें 'विभिन्न अनियमितताएं' बरती गईं.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में सहारा ग्रुप को आदेश दिया था कि वो निवेशकों को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाए और सेबी से इस काम को सुगम बनाने को कहा था.

मुश्किल में सहारा

लेकिन दिसंबर 2012 में सहारा ग्रुप को ये पैसा तीन किस्तों में देने की अनुमति दी गई जिसमें 5,120 करोड़ रुपये का तुरंत भुगतान और उसके बाद दस हजार करोड़ रुपये की किस्त जनवरी के पहले सप्ताह में और शेष फरवरी 2013 के पहले सप्ताह तक देने की बात कही गई थी.

बुधवार को सेबी ने अपने आदेश में कहा कि बाद वाली दो किस्तों में से कोई भी अदा नहीं की गई और इसलिए उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार सहारा समूह के खिलाफ कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है.

सहारा ने 5,120 करोड़ रुपए की पहली किस्त के सिलसिले में भी दावा किया कि इसमें से सिर्फ 2620 करोड़ रुपये दिए जाने शेष हैं और वो पहले ही बॉन्डधारकों को 19,400 करोड़ रुपए अदा कर चुका है.

Image caption काफी समय से विवादों में घिरा है सहारा समूह

सेबी ने सहारा समूह के प्रमुक सुब्रत रॉय और तीन अन्य निदेशकों वंदना भार्गव, रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी के सभी बैंक खाते और डीमेट खातों पर रोक लगाने के साथ साथ तत्काल प्रभाव से उनकी चल और अचल संपत्ति की कुर्की के आदेश दिए हैं.

'पुराने हैं तथ्य'

दूसरी तरफ सहारा समूह ने दावा किया है कि सेबी का आदेश ‘पुराने तथ्यों’ पर आधारित है और शेयर बाजार नियामक का किसी व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की के आदेश देना ठीक नहीं है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सहारा समूह के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा है, “सहारा के अनुसार कुल देनदारी 5120 करोड़ रुपये से ज्यादा होने की संभावना नहीं है और इतनी राशि पहले ही सेबी के पास जमा करा दी गई है.”

समूह के मुताबिक दो अन्य किस्तों के बारे में सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दर्ज किया गया है, जिस पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है.

सहारा के अनुसार सेबी के आदेश जनवरी 2012 के तथ्यों पर आधारित हैं और तब से अब तक चीजें बदल चुकी हैं.

प्रवक्ता ने कहा कि पैसे कंपनियों को लौटाने हैं, ऐसे में व्यक्तिगत संपत्तियों की कुर्की के आदेश उचित नहीं हैं.

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