जिनका 'शौक' बन गया है जान बचाना

एसपी सिंह ओबरॉय
Image caption एसपी सिंह ओबरॉय कहते हैं कि उन्होंने अभी तक 54 लोगों को मौत की सज़ा से बचाया है

एसपी सिंह ओबरॉय वो शख़्स हैं, जिन्होंने उन 17 भारतीयों को बचाया है जिन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एक अदालत ने सज़ा-ए-मौत का आदेश दिया था.

लेकिन ओबरॉय बताते हैं कि उन्होंने केवल इन्हीं 17 लोगों की जान नहीं बचाई है. वे बताते हैं, ''अभी तक मैं 54 लोगों को मौत की सज़ा से बचाने में कामयाब रहा हूँ. इनके अलावा अभी कुछ और मामले चल भी रहे हैं.''

मंगलवार को यह 17 लोग वापस भारत पहुंच पाए और अपने अपने परिवारों से पास चले गए. इनमें से 16 पंजाब से जबकि एक हरियाणा से है.

साल 2010 में दुबई की एक अदालत ने इन 17 लोगों को एक पाकिस्तानी नागरिक मिस्री खान का दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी. लेकिन इन्हें बचाने का ज़िम्मा उठाया एसपी सिंह ने.

इन लोगों को बचाने के लिए ओबरॉय ने दस लाख डॉलर (यानी लगभग 5.3 करोड़ रुपए) मिस्री खान के परिवार को दिए.

वे बताते हैं, ''मैंने इस मामले के बारे में अखबारों में पढ़ा था. जब मुझे पता चला कि यह बहुत गरीब हैं तो मैंने सोचा कि इन्हें बचाने का प्रयास करना चाहिए. मुझे पता चला कि अगर ब्लड मनी या दिया या मौत का मुआवज़ा पीड़ित के परिवार को दे दिया जाए तो वे उन्हें माफ कर सकता है. उन्हें बचाने का बस यही एक तरीका था.''

मिशन

इसके बाद उन्होंने मिस्री खान के परिवार से संपर्क साधा और जब यह जान गए कि ब्लड मनी दे कर वे इन लोगों की जान बचा सकते हैं तो इन्होंने इसे अपना मिशन बना लिया.

ओबरॉय बताते हैं, ''जब मैं दोषियों के परिवार वालों से मिला तो देखा कि इनमें से कुछ तो दिन में दो वक्त की रोटी भी नहीं जुटा पाते. मैंने उनके दुबई में आने का इंतज़ाम किया ताकि जेल में या अदालत में अपने संबंधियों से मिल सकें.''

ओबरॉय ने दुबई के अपने होटल में उनके रहने का भी इंतज़ाम किया.

आखिर यह सब कुछ वे क्यों करते हैं? वे कहते हैं, ''यह कहना बहुत आसान है कि इंसानियत के नाते मैंने यह सब कुछ किया. लेकिन यह सवाल बड़ा मुश्किल है.''

''जब कई साल पहले मैं सबसे पहले इन लोगों से मिला तो मैंने देखा कि इनमें से कुछ बेकसूर है. लेकिन इनके पास खुद को बचाने के कोई ज़रिया नहीं था. फिर मैंने सोचा कि किसी न किसी को तो इनकी मदद करनी ही चाहिए.''

'मसीहा का दर्जा'

एसपी सिंह की तमाम कोशिशों और पैसों के कारण जिन लोगों को नया जीवन मिला है वो इन्हें एक मसीहा का दर्जा देते हैं.

हाल में जो 17 लोग वापस आए हैं उनमें से एक 28 वर्षीय कुलदीप सिंह तो एसपी सिंह को भगवान से कम नहीं मानते.

उनका कहना है, ''वो हमारे लिए मसीहा बन के आए. हम तो सोच बैठे थे कि हमारी ज़िंदगी बस कुछ ही दिन की रह गई है.''

57 वर्षीय ओबरॉय पंजाब से नंगल में पैदा हुए और वहां पर उन्होंने एक इंजन मकैनिक की ट्रेनिंग की. लेकिन साल 1975 में वे जिंदगी में कुछ बड़ा करने के इरादे से वहां से बाहर चले आए.

1000 रुपए लेकर चले थे

उस समय उनके पिता ने उन्हें एक हज़ार रुपए दिए थे.

वहां से वे हिमाचल प्रदेश पहुंचे जहां पर मंडी ज़िले में उन्होंने पंदोह बांध पर मैकेनिक की नौकरी की और फिर उन्हें दुबई में कॉस्टेन टेलर वूदरो में नौकरी मिल गई.

साल 1981 में उन्होंने भारत आ कर अपने परिवार के साथ मिल कर व्यापार शुरू किया लेकिन फिर 1993 में वे दुबई चले गए जहां पर उन्होंने अपना बिज़नेस आरंभ किया.

आज वे एपेक्स ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के चेयरमैन हैं जिसके प्रमुख कार्यों में निर्माण और होटल के कारोबार हैं.

पूछे जाने पर कि उनके खिलाफ बीच बीच में आयकर विभाग की जांच की खबरें भी आती रही हैं तो वो कहते हैं, ''मैंने कुछ गलत नहीं किया है. कोई भी इसमें जांच कर सकता है. कोई अगर यह आरोप लगाए कि मैंने कुछ लाख रुपए इधर उधर किए हैं तो उन्हें यह तो सोचना चाहिए कि मैं करोड़ों रुपए इस तरीके से दान करके कुछ लाख रुपए तो नहीं बचाऊंगा.''

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