लड़ाई सोच में बदलाव के लिए भी....

वन बिलियन राइज़िंग
Image caption जागरूकता अभियान के तहत कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया.

फ़रवरी के मध्य में जब दिन भर का थका हारा सूरज शाम को सोने की तैयारी कर रहा था, दिल्ली के संसद मार्ग पर सैकड़ों बच्चियां, युवतियां और महिलाएं अपनी बुलंद आवाज़ में ये संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही थीं कि अब वो अपने ख़िलाफ़ ज़ुल्मो-सितम सहन नहीं करेंगी.

ये वन बिलियन राइज़िंग - यानी 100 करोड़ महिलाओं की जागरूकता अभियान का हिस्सा था जो विश्व भर के 200 शहरों में बुधवार को आयोजित हुआ.

संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बिल्कुल सामने सड़क के बीचों बीच बड़ा सा बिलबोर्ड लगा था इस संदेश के साथ - 'बस, औरतों पर अब और हिंसा नहीं'.

फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

रोड के दोनों तरफ़ कपड़ों के कत्थई, नीले और लाल रंग के बैनरों पर नारे लिखे थे. 'हर तरह के युद्ध, चाहे वो घर के भीतर हो या घर के बाहर, को हम ना कहते हैं', 'मज़बूत मर्द बराबरी से नहीं डरते', जैसे नारों को पढ़ने के बाद भी जो बात को न समझ पाए होंगे उन्हें शायद फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की इस नज़्म ने उसे साफ कर दिया होगा....

जब ज़ुल्मो सितम के कोहे गिरां रूई की तरह उड़ जाएंगे हम महकूमों के पावों तले जब धरती धड़-धड़ धड़केगी और अहले हुकुम के सर उपर जब बिजली कड़कड़ कड़केगी हम देखेंगें ...

नज़्म की हर लाइन जब गायिका की आवाज़ में गूंज रही थी, तो वहां मौजूद महिलाएं तालियों बजा कर दाद दे रही थीं.

सोच में बदलाव

कईलड़कियों ने बार-बार होठों में उंगुलियां डालकर सीटियों से पास के माहौल को गनगना कर, ये संदेश देने की भी कोशिश की ये महज़ हक़ की लड़ाई नहीं, बल्कि सोच में बदलाव की लड़ाई भी है, जहां लड़कों की सीटी का बुरा नहीं माना जाता लेकिन अगर युवती ऐसा करे तो उसे बुरी सोच मान लेते हैं.

Image caption जागरूकता का ये कार्यक्रम मुंबई में भी आयोजित किया गया

नोएडा के पास के निठारी गांव से आई युवतियों ने एक लघू ड्रामे में महिलाओं के ख़िलाफ़ हर दिन होने वाले अन्याय को पेश करने की कोशिश की. जहां लड़के को स्कूल भेजा जाता है, लेकिन बालिकाएं घर के काम के लिए पीछे रह जाती हैं. भी आयोजित किय

कक्षा आठ में पढ़ाई कर रही श्वेता अपने दल-बल के साथ यहां आई थीं. बाहरी दिल्ली की निवासी श्वेता एक स्वंयसेवी संस्था से जुड़ गई हैं ताकि वो महिलाओं में जागरूकता पैदा कर सकें.

संदेश

कार्यक्रम के बीच में अभियान की संयोजक कमला भसीन ने संदेश जारी किया जिसमें पुरुषों से कहा गया कि वो भी इसका हिस्सा बने.

कहा गया कि ये लड़ाई तबतक जारी रहेगी जबतक महिलाओं को उनका पूरा हक़ नहीं मिल जाता. फिलहाल के संदर्भ में ये कहा गया कि भारत सरकार महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले यौन उत्पीड़न पर वर्मा समिति द्वारा दिए गए सभी सुझावों को लागू करे.

संदेश एक कविता में कुछ यूं आया:

मेरी बहने मांगे

आज़ादी

मेरी बच्ची मांगे

आज़ादी

नारी का नारा

आज़ादी

मज़दूर का नारा

आज़ादी

.....

हम लेके रहेंगे

आज़ादी

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