कारोबारी भारतीयों को तुरंत वीज़ा: कैमरन

  • 18 फरवरी 2013
डेविड कैमरन
Image caption डेविड कैमरन के भारत दोरे से कारोबारी जगत की उम्मीदें बढ़ी हैं.

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने घोषणा की है कि वहाँ निवेश करना चाह रहे कारोबारियों को उसी दिन वीज़ा मुहैया कराने की व्यवस्था शुरू की जाएगी.

कैमरन ने कहा कि ब्रिटेन भारत के साथ '21वीं सदी की महान साझीदारियों' में से एक बना सकता है.

यूनीलिवर के मुख्यालय में मुंबई में एक सवाल जवाब के सत्र में कैमरन ने बताया, "भारत का अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में उदय इस सदी की एक बड़ी घटनाओं में से एक है और काफ़ी प्रभावशाली भी है."

उनका कहना था, "ब्रिटेन आपका स्वाभाविक विकल्प बनना चाहता है. हम जिस तरह की साझेदारी बनाना चाहते हैं उसकी शुरुआत तो हमने अभी की ही है. जहाँ तक मेरा ख़्याल है, इन रिश्तों में असीम संभावनाएँ हैं."

नौकरियाँ

इस बीच डेविड कैमरन के दौरे पर टिप्पणी करते हुए ब्रितानी अख़बार 'द गार्डियन' ने लिखा है कि ब्रिटेन चाहता है कि भारतीय कंपनियां वहां नौकिरियों के और भी अवसर पैदा करे.

इससे पहले जब साल 2010 में डेविड कैमरन भारत आए थे तो ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति चिंताजनक थी.

तब कैमरन ने कहा भी था कि उनका मक़सद ब्रिटेन में भारत की मदद से नौकरियों के अवसर पैदा करना है. उन्होंने कहा था कि भारतीय कंपनियों ने ब्रिटेन में 90 हज़ार नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं.

तीन साल बाद इस आंकड़े में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है.

जानकारों का कहना है कि ब्रिटेन में वीज़ा नियमों को अधिक सख्त किए जाने की वजह अपेक्षित नतीजे नहीं निकले.

बड़ा प्रतिनिधिमंडल

कैमरन की भारत यात्रा का पहला पड़ाव सोमवार को मुंबई में है. दो दिनों के लिए भारत आए ब्रितानी प्रधानमंत्री के साथ एक विशाल प्रतिनिधिमंडल भी है.

कहा जा रहा है कि इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश यात्रा पर जाने वाले वह ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री हैं.

डेविड कैमरन मंगलवार को राजधानी दिल्ली के लिए रवाना होंगे. साल 2010 के बाद प्रधानमंत्री की हैसियत से यह उनका दूसरा दौरा है.

Image caption ब्रिटेन में नौकरियों के अवसरों का सृजन कैमरन के एजेंडे में सबसे ऊपर है.

हालांकि विरोधी दल के नेता के तौर पर डेविड कैमरन पहले भी साल 2006 में भारत आ चुके हैं.

मुंबई का माहौल

उधर मुंबई शहर में कैमरन के दौरे को लेकर कोई बहुत उत्साह नहीं देखा जा रहा है. ज्यादातर लोगों को यह पता भी नहीं है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री मुंबई शहर के दौरे पर हैं.

फ्रांस के राष्ट्रपति ओलान्द के मुंबई आने पर पिछले हफ्ते भी शहर का कुछ ऐसा ही हाल था. अधिकांश लोगों को उनके दौरे में कोई दिलचस्पी नहीं थी.

हालांकि साल 2010 में ओबामा की मुंबई यात्रा या इससे पहले 2000 में अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उसके बाद 2006 में जॉर्ज बुश के दौरे के वक्त शहर में खासा उत्साह देखा गया था.

ब्रितानी अखबार लिखते हैं कि भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्ते पति पत्नी के संबंधों की तरह पुराने पड़ चुके हैं. इसलिए डेविड कैमरन के दौरे को लेकर कोई बहुत उत्साह नहीं देखा जा रहा है.

रिश्तों में गर्मजोशी लाने के लिए कैमरन के पास नया कुछ नहीं है.

वीज़ा नियम

Image caption कैमरन ने भारतीय छात्रों की आशंका का जवाब दे दिया है.

इस बीच कैमरन ने ब्रिटेन आने वाले भारतीयों छात्रों की संख्या पर किसी तरह की कटौती की आशंका से इनकार किया है और कहा है कि पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों पर कोई रोक नहीं है.

मुंबई यात्रा के दौरान ब्रितानी प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनकी सरकार भारतीय कंपनियों के मामले में ढील देने के लिए तैयार है.

इस समय ब्रिटेन में पांच सौ से अधिक भारती कंपनियों ने निवेश कर रखा है.

पिछले दस सालों में भारतीय कंपनियों ने ब्रिटेन में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं.

लेकिन भारतीय कारोबारियों को अफ्रीका और अमरीका में अधिक फायदा नज़र आता है.

डेविड कैमरन इस बार पिछली बार से भी बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर भारत आये हैं.

उन्हें उम्मीद है कि भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में ज्यादा निवेश करेंगी और यहां के ठेके भी उनके कारोबारियों को मिलेंगे.

बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ आने का यह मतलब साफ तौर पर निकाला जा सकता है कि डेविड कैमरन भारत से ब्रिटेन के कारोबारी रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए बेचैन हैं.

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