भारतीय लोकतंत्र का साथ देने की सज़ा: कश्मीरी सरपंच

  • 25 फरवरी 2013
Image caption पंचायत नेताओं ने राज्य सरकार से अपनी सुरक्षा की मांग की है

उत्तर कश्मीर में एक और सरपंच की हत्या के बाद राज्य के पंचायत नेताओं के संगठन ने इसके लिए अलगाववादी चरमपंथी संगठनों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायती कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष शफ़ीक़ मीर ने पुंछ से फ़ोन पर बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा, "अफ़ज़ल गुरू की फाँसी के बाद हमें ये अंदेशा था कि अब यहाँ पर अतिवादी संगठन जनतंत्रवादी ताकतों को निशाना बनाएंगे. पंचायत लीडर उनके लिए सॉफ़्ट टारगेट थे. इसीलिए पंचायती लीडरों को निशाना बनाया जा रहा है."

रविवार को कुछ बंदूकधारियों ने जावेद अहमद वाणी को बारामूला के एक गाँव में मार डाला. वाणी चालीस वर्ष के थे.

इससे एक महीना पहले सोपोर में भी एक सरपंच को मार डाला गया था, साथ ही एक महिला पंच को घायल कर दिया गया था.

धमकी

राज्य में अब तक पंचायत के पाँच नेता मारे गए हैं: कुलगाम में सरपंच अली अहमद डार, उप सरपंच ग़ुलाम मोहम्मदीन, सोपोर में सरपंच हबीबुल्ला मीर, बारामूला में सरपंच अली मोहम्मद तेली और बारामूला के ही अली अहमद वाणी.

पंचायती नेताओं के संगठन के अध्यक्ष शफ़ीक़ मीर ने कहा, "दो नवंबर 2012 को यूनाइटेड जिहाद काउसिल के चेयरमैन सैयद सलाहुद्दीन ने खुली धमकी दी थी कि जम्मू कश्मीर में पंचायत लीडरों को निशाना बनाया जाएगा, मारा जाएगा क्योंकि ये राज्य में भारत के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं."

उन्होंने कहा कि तब से लेकर आज तक हमारी ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायती कॉन्फ़्रेंस राज्य सरकार से पंचायत लीडरों की सुरक्षा का इंतज़ाम करने की माँग कर रही है. लेकिन आज तक राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने इस सिलसिले में कुछ नहीं किया.

मीर कहते हैं कि पंचायत लीडरों की जान ख़तरे में हैं क्योंकि "हमने ये गुनाह किया है. भारत के जनतंत्र की ख़ातिर चुनाव लड़ा है. इसी गुनाह को समझ के हमें मारा जा रहा है."

असुरक्षा

उनके मुताबिक़ जम्मू कश्मीर में 4,125 सरपंच हैं जिनमें से पाँच मारे जा चुके हैं. पंचों की संख्या 29,700 है.

कश्मीर घाटी में पिछले छह महीनों में पांच सरपंचों की हत्या हो चुकी है. दो सरपंचों की तो इसी साल जनवरी में हत्या कर दी गई.

खौफ के चलते दर्जनों सरपंच अब तक इस्तीफा भी दे चुके हैं.

सरपंचों का संगठन लगातार उमर अब्दुल्ला सरकार से सुरक्षा की मांग कर रहा है लेकिन तमाम सरकारी दावों और वादों के बावजूद घाटी में सरपंच सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं.

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