'राजनाथ का बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश'

Image caption राजनाथ सिंह का बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण की शुरुआत माना जा सकता है.

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह का माया कोडनानी के बारे में दिया गया बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण की एक कोशिश है.

यह कहना है गुजरात में टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमठ का.

अजय उमठ कहते हैं कि नरेंद्र मोदी ने भी पिछले साल संपन्न हुए गुजरात चुनावों से पहले राजीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश राज्य में शुरू की थी जिसके तहत वो राजनीतिक सभाओं में भगवा कपड़े पहन कर जाते थे और किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया गया था.

इसी तरह राजनाथ सिंह भी जब पार्टी अध्यक्ष बने हैं तो पहले राम मंदिर पर बयान और अब इस तरह का बयान दे रहे हैं.

माया कोडनानी का मामला फिलहाल कोर्ट में है तो फिर राजनाथ सिंह ने उन्हें क्लीन चिट देने जैसी बात क्यों की?

अजय बताते हैं कि इस नरेंद्र मोदी कैबिनेट में दो साल तक मंत्री रही माया कोडनानी के मामले में स्थानीय कोर्ट ने सज़ा दी है 28 साल की जिसके खिलाफ़ हाई कोर्ट में अपील की गई है.

मामला

हालांकि हाई कोर्ट में मामला दायर है और इसकी आखिरी सुनवाई अभी बाकी है. स्थानीय कोर्ट के न्यायाधीश ने इस मामले में यहां तक कहा था कि माया कोडनानी जैसे लोग समाज में कैंसर की तरह हैं.

अजय उमठ कहते हैं कि इस तरह के मामले में बयान देकर लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण तो होता ही है लेकिन भाजपा नेता राजनाथ सिंह और मोदी इस ध्रुवीकरण को हिंदुत्व की तरफ मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

राजनाथ सिंह के इस बयान से राजनीतिक ध्रुवीकरण में कितनी मदद मिलेगी ये कहना तो फिलहाल मुश्किल है लेकिन एक बात तय है कि भारतीय जनता पार्टी ने ये साफ कर दिया है कि अगले चुनावों तक हिंदुत्व को मुद्दा बनाने की पूरी कोशिश की जाएगी.

वैसे गुजरात के चुनावों को देखा जाए जब नरेंद्र मोदी पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उससे पहले लाल कृष्ण आडवाणी के लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की हालत खराब थी और वो वहां स्थानीय निकाय के चुनाव भी हारे थे.

ऐसे में गोधरा और गोधरा के बाद के दंगों ने पूरी राजनीतिक बिसात ही बदल दी और फिर मोदी लगातार मुख्यमंत्री बनते रहे हैं.

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