माया कोडनानी: राजनाथ सही या कोर्ट?

Image caption माया कोडनानी नरेंद्र मोदी सरकार की पूर्व मंत्री है. तस्वीर एपी

गुजरात के नरोदा पाटिया दंगों के मामले में विशेष अदालत ने भले ही नरेंद्र मोदी सरकार की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को 28 साल की जेल की सज़ा सुनाई हो लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह कोडनानी को बेक़सूर मानते हैं.

राजनाथ का बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश

मोदी को पार्टी का सबसे लोकप्रिय नेता मानने वाले राजनाथ सिंह से जब ये पूछा गया कि 2002 के दंगों में अभियुक्त माया कोडनानी या अमित शाह जैसे नेताओं को मंत्रिपरिषद में जगह देने वाले मोदी राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य कैसे होंगे तब उन्होंने कोडनानी को ये 'क्लीन चिट' दी.

गुजरात दंगों के 10 साल पर बीबीसी हिंदी विशेष

बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में सिंह ने कहा, "गुजरात के प्रत्यक्षदर्शी भी ये मानते हैं कि हम लोगों ने जो भी देखा है उसमें कोडनानी का कहीं कोई हाथ नहीं था."

कैसे दंगों की आग में झुलसा गुजरात- तस्वीरें

ये पूछे जाने पर कि क्या पार्टी विशेष अदालत के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं है, उन्होंने कहा, "एक अदालत का फ़ैसला आया है, हम उसका सम्मान करते हैं. अब दूसरी अदालत में अपील हुई है फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील होगी. ये सिलसिला तो चलेगा ही."

मोदी 'विभाजनकारी'?

Image caption राजनाथ सिंह कहते हैं कि अगले चुनाव में मोदी की प्रभावी भूमिका होगी. तस्वीर गेटी

राजनाथ सिंह ने कहा, "किस आधार पर विपक्षी दल ये कहते हैं कि मोदी विभाजनकारी नेता हैं. अगर कोई मानता है कि 2002 का गुजरात का दंगा नरेंद्र मोदी ने कराया है तो ये सरासर ग़लत है. कोई भी मुख्यमंत्री ये नहीं चाहेगा कि उसके मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य में दंगे हों."

कांग्रेस को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा, "क्या केवल गुजरात में ही दंगे हुए? वहाँ तो केवल एक दंगा हुआ. उससे पहले जब कांग्रेस की सरकार रही तो 10 वर्षों में 10 दंगे हुए होंगे. उसकी कोई चर्चा नहीं करता."

नरोदा पाटिया मामला

कोडनानी मामले पर अदालत ने कहा क्या था?

नरोदा पाटिया के दंगे 28 फरवरी 2002 को गोधरा कांड के बाद हुए थे जब वहाँ घेर कर 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी. आरोप था कि इस भीड़ का नेतृत्व कोडनानी ने किया था.

इसी मामले में कोडनानी को दो धाराओं में सजा दी गई थी. एक धारा में उन्हें 10 साल जबकि दूसरी धारा में उन्हें 18 वर्ष की सजा दी गई.

कोडनानी तीन बार पार्टी की विधायक रहीं और मोदी सरकार में मंत्री भी थीं. पर 2009 में जब सर्वोच्च न्यायालय की ओर से नियुक्त विशेष टीम ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया और फिर बाद में गिरफ़्तार किया तो उन्हें पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.

Image caption राजनाथ सिंह मोदी को एनडीए का सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बताते हैं. तस्वीर रॉयटर्स

वह पहली विधायक थीं जिन्हें गोधरा दंगों के बाद सज़ा हुई.

भाजपा को झटका

कोडनानी को सज़ा होने के बाद राज्य में पार्टी उस पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने से बचती रही है और स्थानीय सूत्रों के अनुसार पार्टी को कोडनानी की सज़ा से बड़ा झटका भी लगा था.

ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का खुलकर इस तरह कोडनानी का समर्थन करना एक तरह से ये संकेत भी दे रहा है कि मोदी का पार्टी में प्रभाव किस तरह हर स्तर पर बढ़ रहा है.

राजनाथ सिंह ने कोडनानी को मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर मोदी का बचाव करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री यदि इस बात से संतुष्ट हो जाए कि यह व्यक्ति सचमुच अपराधी है तो वो उसे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करेगा. जब उनकी सज़ा हुई तब तो उन्होंने उन्हें मंत्रिमंडल में नहीं रखा न."

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