पेट्रोल की कीमतें फिर बढ़ीं

भारतीय तेल
Image caption पिछले दो हफ्तों में पेट्रोल के दामों में ये दूसरी बड़ी वृद्धि है

भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने पेट्रोल के दामों में एक रुपए 40 पैसे की वृद्धि की है जिससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा.

बढ़ी हुई दरें मध्यरात्रि से लागू हो गईं.

पिछले दो हफ्तों में पेट्रोल के दामों में ये दूसरी बड़ी वृद्धि है.

जून 2010 के बाद से लागू नए आर्थिक माहौल में सरकारी कंपनियाँ पेट्रोल के दाम बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं. रिपोर्टों के अनुसार तबसे ये 21वीं बार है कि पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं.

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने एक वक्तव्य में कहा कि बढ़े अंतरराष्ट्रीय दामों और रुपए के मूल्य में गिरावट के कारण कीमतों में वृद्धि की जरूरत पड़ी और आगे भी इन दोनो दरों में बदलाव का असर पेट्रोल के दामों पर दिखेगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस वृद्धि में बिक्री कर या वैट शामिल नहीं है इसलिए उपभोक्ताओं को पेट्रोल के लिए ज्यादा धन देना पड़ा सकता है.

16 फरवरी को इंडियन ऑयल ने पेट्रोल के दामों में 1.50 रुपए की वृद्धि की घोषणा हुई थी.

बढ़े हुए दामों के बाद जहाँ दिल्ली में उपभोक्ताओं को प्रति लीटर पेट्रोल के लिए करीब 71 रुपए देने होंगे, मुंबई में लोगों की जेबें 77.66 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से ढीली होंगी.

कारण

कंपनी ने कहा कि पिछली बार जब कंपनी ने दाम बढ़ाए थे उसके बाद से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में एक बैरल पेट्रोल के दाम 128.57 अमरीकी डॉलर से बढ़कर 131 अमरीकी डॉलर हो गए जबकि रुपए की कीमत 53.43 से गिरकर 54.15 हो गई थी.

तेल कंपनियों का कहना रहा है कि उन्हें सब्सिडी के कारण डीजल, केरोसीन, एलपीजी और पेट्रोल की बिक्री में रोज करीब 450 करोड़ का घाटा होता है और इसलिए दाम बढ़ाने जरूरी हैं.

उधर आलोचक कहते हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के दूसरे बेहतर रास्ते मौजूद हैं और इन कंपनियों के घाटों को वित्त मंत्रालय पूरा करता रहा है इसलिए कंपनियों का घाटे का बात करना बेमानी है.

भारत तेल की अपनी 80 प्रतिशत जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है.

वर्ष 2030 तक तेल के आयात पर भारतीय निर्भरता को कम करने के उपाय ढूँढने के लिए सरकार ने वित्त मंत्रालय के पूर्व सलाहकार विजय केलकर के नेतृत्व में कमेटी गठन करने का प्रस्ताव किया है जो दो महीनों में अपनी रिपोर्ट देगी.

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