ज़िंदगी से प्यार है, इसलिए लड़ रही हूं: इरोम

इरोम शर्मीला
Image caption इरोम शर्मीला के समर्थन में मणिपुर के दिल्ली में मौजूद बहुत सारे छात्र अदालत के सामने जमा थे.

पिछले 12 सालों से सैन्य विशेषाधिकार क़ानून के ख़िलाफ़ अनशन कर रही मणिपुर की इरोम शर्मिला ने आत्महत्या के प्रयास से इनकार किया है और कहा है कि वो जिंदगी से प्यार करती हैं.

दिल्ली की एक अदालत में जज के सामने पेश हुई इरोम का कहना था कि वो जिंदगी से प्यार करती हैं, उसकी क़द्र करती हैं, और यही कारण है कि वो मणिपुर में हुकूमत के ज़रिए की जा रही ज़्यादतियों का विरोध कर रही हैं.

दिल्ली पुलिस ने उनपर आत्महत्या का मुक़दमा दर्ज किया था. ये मुक़दमा साल 2006 के एक अनशन से संबंधित है.

भारतीय दंड संहिता की धारा 309, यानी अपनी जान लेने की कोशिश के लिए किसी व्यक्ति को एक साल की सज़ा का प्रावधान है, जबकि इरोम शर्मिला पिछले छह सालों से पुलिस की हिरासत में हैं.

'आत्मसम्मान की ज़िंदगी'

लेकिन जब मेट्रोपोलिटन जज आकाश जैन ने उन्हें मुक़दमें की पूरी प्रक्रिया समझाई तो उन्होंने जुर्म क़बूल करने से ये कहकर मना किया कि उनका इरादा अपनी जान लेने का कभी नहीं रहा है.

उन्होंने कहा कि वो महज़ भारत सरकार के मणिपुर के लोगों पर हो रहे ज़ुल्म और सेना को मिले विशेषाधिकार को ख़त्म किए जाने के लिए अहिंसक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रही हैं.

इरोम शर्मिला को क़ानूनी सलाह देने वाली वकीलों के दल के स्वेतलाना कोरिया ने कहा, "पूरी तरह से शांत और ख़ुद पर क़ाबू रखे हुए इरोम शर्मिला ने जज से कहा कि वो अपनी जान नहीं लेना चाहतीं, बल्कि आत्मसम्मान का जीवन जीना चाहती हैं."

उन्होंने अदालत से कहा, "जिस दिन सेना को दिया गया विशेषाधिकार क़ानून ख़त्म कर दिया जाएगा, वो भोजन ग्रहण करना शुरू कर देंगी."

राजनीतिक प्रक्रिया

इरोम शर्मिला पिछले बारह सालों से भोजन ग्रहण नहीं कर रही हैं, और उन्हे नाक के रास्ते जबरन तरल आहार दिया जाता है.

अदालत का कहना था कि उनकी मांग एक राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, और वो सिर्फ़ एक मामले, यानी इरोम शर्मिला पर लगे आत्महत्या के आरोप की सुनवाई कर रहे हैं.

कोर्ट ने मामले को सुनवाई को लिए दर्ज कर लिया है. मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी.

अब मामले में सरकारी पक्ष को अपनी दलील पेश करनी है.

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