'सांप्रदायिक हिंसा' से थर्राया उत्तर प्रदेश का टांडा

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Image caption आगजनी के बाद का एक दृश्य

पूर्वी उत्तरप्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के टांडा शहर में अनियंत्रित भीड़ ने रविवार को आधी रात के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के कई घर जला डाले.

बताया जा रहा है कि ये भीड़ कथित तौर पर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं की थी.

इस घटना के बाद टांडा शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है.

शहर में कर्फ्यू के सवाल पर फैज़ाबाद के कमिश्नर विपिन कुमार द्विवेदी ने बताया, “टांडा में हिंसा की कुछ घटनाएं हुई हैं लेकिन हमें लगता है कि हालात पर काबू पा लिया गया है. हिंसा की कुछ नई घटनाओं के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है.”

हिंसा से हताहत

खबरों के मुताबिक इस आगजनी में अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.

हालांकि घायल होने वाले लोगों में सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल हैं.

अनियंत्रित भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज और हवा में गोलियां भी चलाई.

पुलिस महानिरीक्षक सुभाष चंद्र ने कहा, “हम मामले की जांच कर रहे हैं. रविवार रांत को भड़के दंगों पर हमने काबू पा लिया है. टांडा शहर और उससे जुड़े इलाकों में सुरक्षा का बंदोबस्त कर दिया गया है.”

हिंदू युवा वाहिनी

इलाके में रविवार देर रात को हिंदू युवा वाहिनी के एक स्थानीय नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

Image caption हिंसा से प्रभावित लोग अभी भी सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं.

अंबेडकरनगर जिले के टांडा शहर में हिंदू युवा वाहिनी के स्थानीय नेता राम बाबू गुप्ता को अदालतपुर इलाके के एक भीड़ भरे बाजार में मोटरसाइकल सवारों ने करीब से गोली मार दी थी.

यह इलाका अलीगंज थाने के करीब पड़ता है. राम बाबू गुप्ता की मौत का भरोसा हो जाने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए.

खबरों के अनुसार इसके बाद से ही संगठन के कार्यकर्ताओं में आक्रोश व्याप्त था.

हालांकि पुलिस मौका-ए-वारदात पर पुहंच गई थी. लेकिन कथित तौर पर इसके बाद हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की गाड़ियों को जला दिया और उनके जवानों पर हमला भी किया.

सैंकड़ों लोग बेघर

जानकारों के मुताबिक इस हमले में पुलिस के जवान बुरी तरह से घायल हो गए हैं.

हालांकि राम बाबू गुप्ता के कातिलों के बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है. लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने इस घटना को सांप्रदायिक रंग दे दिया.

हिंसा की घटनाओं के बाद सैंकड़ो लोग बेघर हो गए हैं और उनके बदन पर केवल वही कपड़े रह गए जो उन्होंने पहन रखे थे.

प्रभावित लोगों तक राज्य सरकार या स्थानीय प्रशासन ने कोई मदद नहीं पहुंचाई है.

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