उपहास झेलता बलात्कार पीड़िता का परिवार

  • 8 मार्च 2013
बलात्कार
Image caption 1996 के इस कांड में 16 साल की लड़की का 40 दिनों तक 42 लोगों ने बलात्कार किया था

एक तरफ जहाँ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला विकास को लेकर बढ़-चढ़ कर बातें की जा रही हैं, दूसरी ओर सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार पीड़िता के परिवार को समाज के तानों के कारण प्रार्थना के लिए चर्च जाना भी बंद करना पड़ा है.

पीड़िता के पिता के मुताबिक स्थानीय चर्च के पादरी फादर ज़ेवियर मम्मूटिल ने उनसे कुछ समय के लिए चर्च नहीं आने को कहा है.

उधर सिरो-मालाबार चर्च के प्रवक्ता फादर पॉल थेलाकाट के मुताबिक किसी भी पादरी को ऐसा कहने का अधिकार नहीं है कि वो चर्च नहीं आएँ.

दक्षिणी राज्य केरल के कोट्टायम जिले से पीड़िता के पिता ने फोन पर बताया कि जब भी वो बाजार या चर्च जाते थे तो मिलने वाले लोग उनका उपहास उड़ाते थे.

उन्होंने बताया, “मैं एक शोषित बच्ची का पिता हूँ. तो सभी लोग मेरे ऊपर हंसते हैं. जब मैं चर्च जाता हूँ तो लोग मेरी ओर देखकर हंसते हैं. इसका मतलब है कि मैं अकेला कुछ लोगों के साथ लड़ रहा हूँ.”

वो कहते हैं कि लोग उनके घर आने से और बात करने से कतराते हैं, और जब वो बाजार जाते हैं तो उनके बारे में बात करके हंसते हैं.

उन्होंने कहा कि वो डरे हुए हैं. वो फोन पर शांत आवाज में कहते हैं, “मुझे पता नहीं कि ये लोग मुझपर क्यों हंसते हैं. मैने क्या गलती की है?”

शर्मिंदगी?

पीड़िता के पिता के मुताबिक जब 10 फरवरी को वो चर्च गए तो फादर मम्मूटिल ने उनसे कथित तौर पर कहा, “अब आप टीवी पर आ रहे हैं और चर्च के सभी लोग आपको जानते हैं, अगर आप इस दौरान चर्च आएंगे तो लोग आपको पहचान लेंगे. बेहतर होगा कि आप कुछ वक्त तक चर्च नहीं आएँ ताकि आपको परेशानी नहीं हो.”

उधर फादर थेलाकाट कहते हैं कि हो सकता है कि फादर मम्मूटिल ने पीड़िता के पिता को ऐसा करने के लिए मात्र दोस्ताना सलाह दी होगी.

वो कहते हैं, “मैने फादर मम्मूटिल से बात की है और वो इस बात से इनकार करते हैं कि उन्होंने पीड़िता के पिता को चर्च नहीं आने को कहा. हो सकता है कि उन्होंने परिवार को शर्मिंदगी से बचाने के लिए दोस्ताना सलाह दी होगी. लेकिन अगर उन्होंने ऐसा भी किया था तो वो गलत था.”

वर्ष 1996 के इस बहुचर्चित सामूहिक बलात्कार कांड में 16 साल की एक लड़की का 40 दिनों तक 42 लोगों ने बलात्कार किया था.

सूर्यनेल्ली के इडुक्की ज़िले की रहने वाली इस लड़की का वर्ष 1996 में अपहरण कर लिया गया था, फिर उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया और बलात्कार किया गया.

छह सितंबर 2000 को विशेष अदालत ने 35 लोगों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न शर्तों पर कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी.

लेकिन केरल हाई कोर्ट ने 35 लोगों को बरी कर दिया और सिर्फ़ एक व्यक्ति को सेक्स व्यापार का दोषी मानते हुए पाँच साल की क़ैद और 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया था.

वर्ष 2005 में लड़की के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी जहाँ पिछले आठ साल से ये मामला लटका हुआ था. तीन जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर इस मामले की सुनवाई की बात कही थी.

पीड़िता ने अपने आरोपों में राज्यसभा उपप्रमुख पीजे कुरियन का भी नाम लिया था लेकिन हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने कुरियन के खिलाफ जांच की पीड़िता की याचिका को खारिज कर दिया.

पीड़िता के पिता के मुताबिक उन्हें कुछ महिला संगठनों के अलावा स्थानीय चर्च और आम लोगों से कोई समर्थन नहीं मिला है.

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