विरोध के बीच परवेज़ अशरफ़ ने की ज़ियारत

  • 9 मार्च 2013
Image caption पाकिस्तान के प्रधानमंत्री निजी यात्रा पर अजमेर आए हैं

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ अजमेर में ख़्वाजा की दरगाह पर ज़ियारत के बाद वापस लौट गए हैं. इस बीच उनके भारत का आगमन का विरोध कर रहे कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है.

पाक पीएम के दौरे का विरोध कर रहे वकीलों पर अजमेर में लाठीचार्ज की भी ख़बर है. ये लोग भारत-पाक सीमा पर भारतीय सैनिकों के साथ हुए अमानवीय बर्ताव को लेकर परवेज अशरफ का विरोध कर रहे थे.

राजा परवेज़ अशरफ़ के साथ 48 लोग आए थे जिनमें उनके परिवार के लोग भी शामिल हैं.

इस बीच उनकी यात्रा का विरोध भी जारी है. अजमेर में करणी सेना के सदस्यों ने उन्हें काले झंडे दिखाए. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध का प्रयास किया.

अजमेर में पुलिस ने विरोध की कोशिश कर रहे विश्व हिंदू परिषद के एक नेता शशि प्रकाश समेत छह लोगों को हिरासत में भी लिया है.

होटल में स्वागत

इससे पहले जयपुर में हवाई अड्डे पर भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक होटल में राजा परवेज़ अशरफ़ का स्वागत किया.

प्रेक्षक कहते हैं कि हाल में उठे विरोध के स्वरों को देखते हुए खुर्शीद ने होटल में ही अगवानी करना ठीक समझा.

अजमेर दरगाह प्रमुख ने कहा था कि वहाँ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ का स्वागत नहीं होगा, लेकिन दरगाह में खादिमो की संस्था के मुताबिक दरगाह में कोई भी श्रदालु आ सकता है.

स्थानीय वकीलों ने भी राजा परवेज़ अशरफ़ की यात्रा का विरोध किया.

परवेज अशरफ रिश्तो में उतार-चढाव के बीच दिल में रूहानी सुकून की मुराद लेकर भारत आए थे, लेकिन अजमेर में उनके प्रति कुछ संगठनों के विरोध को देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे.

दरगाह के दीवान जेनुअल आबेदीन ने उन्हें अपने हाथो पारंपरिक सत्कार से नवाजने से इंकार कर दिया था.

सज्जादानशींन आबेदीन ने ये कह कर उनके स्वागत से इंकार किया था कि पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सैनिको का सिर कलम कर बहुत बुरा किया, लिहाजा वो विरोध स्वरूप दरगाह में आगमन पर पारम्परिक स्वागत नहीं करेगे.

Image caption सैयद जैनुल आबेदीन अली खान, दीवान, अजमेर शरीफ़ दरगाह

अजमेर की बार एसोसिएशन ने भी उनके सुर में सुर मिलाया था, वकीलों के संगठन ने परवेज अशरफ का विरोध किया.

वकीलों का कहना था कि परवेज अशरफ को सरकारी मेहमान का दर्जा देना ठीक नहीं है क्योंकि पाकिस्तानी सेना ने हिंदुस्तान के फौजियों के साथ कथित तौर पर बड़ी नाइंसाफी की है.

दरगाह दीवान ने कहा कि पाकिस्तान एक इस्लामी राज्य है मगर उनके सैनिकों ने कथित तौर पर जो किया वो इस्लाम की शिक्षा के खिलाफ है.

उन्होंने कहा, ''ये कोई पहली घटना नहीं थी. इससे पहले भी पाकिस्तान ये ही करता रहा है. वहां अल्पसंख्यको के जान-माल की कोई सुरक्षा नहीं है. इस्लाम तो अपने पड़ोसियो और सभी से भाईचारे के बर्ताव की सीख देता है."

उधर दरगाह में खादिमो की संस्था अंजुमन के मुताबिक दरगाह में कोई भी श्रदालु आ सकता है.

दरगाह सबके लिए खुला है

अंजुमन के सचिव वाहिद हुसैन चिश्ती कहते है कि दरगाह में किसी भी जाति-बिरादरी, मुल्क और मजहब का व्यक्ति दुआ के लिए हाजरी दे सकता है.

उन्होंने कहा, "ये ऐसी जगह है जो प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है. यहाँ कोई भी आकर अपना सिर झुकाकर इबादत कर सकता है. खवाजा की चोखट कोई भेदभाव नहीं करती."

पाकिस्तानी प्रधान मंत्री दरगाह में दुआ करेंगे, ख्वाजा की शान में चादर भेंट करेंगे और दुआ करेंगे. वो दरगाह में कोई आधे घंटे तक रहेंगे.

इससे पहले दरगाह में बाकी जायरीन का आना-जाना बंद रहेगा. दरगाह इलाके में दुकाने भी इस दौरान बंद रहेगी. अंजुमन के मुताबिक दरगाह में उनका पारम्परिक तरीके से स्वागत किया जायेगा.

दरगाह के खादिम कहते है ये परम्परा है कि जब भी कोई राष्ट्र-प्रमुख यानि राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री दरगाह आते है तो मुख्य दरवाजे पर अंजुमन के पदाधिकारी, खादिम, नाजिम और दीवान उन्की अगवानी करते है.

फिर जियारत कर लौटते मेहमान का साहबजादी के दालान में अंजुमन की और से स्वागत किया जाता है.

इसी क्रम में बुलंद दरवाजे पर दरगाह के नाजिम या सदर और मुख्यद्वार पर दरगाह के दीवान स्वागत करते है.

अंजुमन ने साफ़ किया है दरगाह में किसी भी जायरीन की जियारत खादिम कराते है , ना की दरगाह दीवान.

वैसे दरगाह दीवान और खादिमो के बीच विवाद का सिलसिला पुराना है.

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