सुरक्षित जेल में कैसे हुई राम सिंह की मौत?

Image caption तिहाड़ जेल को देश की सबसे सुरक्षित जेल माना जाता है

दिल्ली की तिहाड़ जेल अपनी वेबसाइट में कैदियों की ‘सुरक्षित हिरासत’ का वादा करती है.

लेकिन दक्षिण एशिया की इस सबसे बड़ी जेल में दिल्ली गैंग रेप के अभियुक्त की मौत ने जेल में कैदियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भारत के लिए ये घटना शर्मिंदा करने वाली है.

55 साल पुरानी जेल की आधिकारिक क्षमता 6000 कैदियों को रखने की है लेकिन इसमें 12 हज़ार से ज़्यादा कैदी हैं.

ये भारत की सबसे हाई-प्रोफ़ाइल जेल भी है, जिसमें भ्रष्टाचार के मामलों में अभियुक्त कई नेता और कारोबारियों को हिरासत में रखा गया है.

अधिकारी कहते हैं कि तिहाड़ देश की सबसे आधुनिक और सुरक्षित जेल है. ये सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल फ़ोन जैम करने के उपकरण, स्कैनर और मेटल डिटेक्टर से लैस है.

इसका विस्तृत अहाता देखने में जेल नहीं लगता. यहां आने वालों को कैदी ब्रेड, जूते, फ़र्नीचर, कागज़ और कपड़े बनाते हुए दिखाया जाता है.

दिल्ली गैंग रेप अभियुक्तों के वकीलों ने जनवरी में शिकायत की थी कि तिहाड़ में उनके मुवक्किलों को यातनाएं दी जा रही हैं. इसके बाद तिहाड़ जेल के प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने बीबीसी को कहा था कि अभियुक्तों की सुरक्षा की ‘गारंटी’ है.

तो क्या गड़बड़ हुई

गुप्ता कहते हैं कि मृतक, राम सिंह, पर खुदकुशी के डर से नज़र नहीं रखी जा रही थी. उसने खुदकुशी करने के लिए “सेल में मौजूद कंबल को रस्सी बनाकर इस्तेमाल किया”.

राम सिंह के परिजन और वकील इस आधिकारिक बयान को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. वो मीडिया को बता रहे हैं कि जेल में राम सिंह की “हत्या” की गई है.

उसके वकील ने बीबीसी को कहा कि शुक्रवार को जब आखिरी बार उन्होंने देखा था तो उनका मुवक्किल स्वस्थ और ठीक लग रहा था.

भारतीय जेलों में आत्महत्या और हत्या सामान्य घटना नहीं हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 में 1393 जेलों में कुल 1436 कैदियों की मृत्यु हुई. इसमें से 92 की मौत ‘अस्वाभाविक कारणों’ से हुई, जिनमें आत्महत्या और कैदियों द्वारा हत्या शामिल है.

ज़्यादातर ‘अस्वाभाविक’ मौतें आत्महत्या (68) और कैदियों द्वारा हत्या (12) के चलते हुईं.

तिहाड़ का रिकॉर्ड भी बेदाग नहीं है. जेल प्रमुख विमला मेहरा के अनुसार पिछले साल 18 कैदियों की मौत हुई है जिनमें से दो मामले आत्महत्या के थे.

इलाज में लापरवाही की वजह से भी कैदियों की मौत हुई है. 2011 में दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकारियों को बिस्कुट उद्योगपति राजन पिल्लई की बीवी को हर्जाना देने का आदेश दिया था. समुचित इलाज न मिलने की वजह से 1995 में पिल्लई की तिहाड़ में मौत हो गई थी.

कोर्ट ने ये भी कहा था कि तिहाड़ में मौतें कोई “असामान्य घटना” नहीं है.

मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर डेमोक्रिटेक राइट्स की 2011 की एक रिपोर्ट में तिहाड़ के कैदियों के तिहाड़ में, “आने वालों से सम्मान के साथ मिलने और इलाज की सुविधा,” के अधिकार से संबंधित सवाल उठाए थे.

जिन वरिष्ठ जेल अधिकारियों से मेरी बात हुई उन्होंने आश्चर्य जताया कि राम सिंह पर खुदकुशी की आशंका से नज़र क्यों नहीं रखी जा रही थी.

समस्या

Image caption दिल्ली गैंप रेप के आरोपी राम सिंह की कथित आत्महत्या से तिहाड़ जेल में कैदियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं

वो कहते हैं कि हाई प्रोफ़ाइल कैदी- सामान्यतः जिन पर हत्या का मामला चल रहा होता है या दोष साबित हो चुका होता है या आतंकवाद से जुड़े मामले होते हैं- पर आत्महत्या की आशंका से नज़र रखी जाती है और उनकी ज़्यादा सुरक्षा भी की जाती है क्योंकि उन पर मीडिया की नज़र होती है और वो अन्य कैदियों के गुस्से का भी शिकार हो सकते हैं.

मुझे बताया गया कि कई ऐसे कैदियों को कोठरी में संख्या के हिसाब को दरकिनार कर अन्य कैदियों के साथ रखा जाता है और जेलर बाकी कैदियों को उन पर नज़र रखने की ताकीद भी करते हैं.

कोठरी के बाहर पहरेदार तैनात रहते हैं और कई मामलों में तो जेल की सीसीटीवी से निगरानी भी की जाती है. मुझे याद है कि कुछ साल पहले कोलकाता में जेलर के कमरे में बैठकर मैं आफ़ताब अंसारी की छोटी सी कोठरी की काली-सफ़ेद सीसीटीवी फुटेज देख रह था.

उसे 2002 में अमरीकी कल्चरल सेंटर में हुई गोलीबारी के मामले में मौत की सज़ा मिली थी.

एक वरिष्ठ जेल अधिकारी कहते हैं, “लेकिन आत्महत्या फिर भी होती है. हमारी जेलों में कैदियों में मानसिक बीमारियां भी आम हैं. वो अक्सर वेंटीलेटर या लोहे के दरवाज़ों से अपनी चादरों को बांधकर फ़ांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर लेते हैं. सुबह-सुबह, जब बाकी कैदी गहरी नींद में होते हैं और पहरेदार या तो झपकी ले रहे होते हैं या थोड़ी देर के लिए बाहर निकले होते हैं, ये हो सकता है.”

वर्ष 2000 से अब तक भारतीय जेलों में 10000 से ज़्यादा कैदियों की मौत हो चुकी है. हिरासत में मौत एक भयानक धब्बा है और स्पष्ट रूप से कैदियों की ज़िंदगी को सुरक्षित बनाने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है.

संबंधित समाचार