राम सिंह की मौत: सोशल मीडिया पर 'जश्न'

  • 11 मार्च 2013
Image caption सोशल मीडिया पर दिल्ली बलात्कार अभियुक्तों को फांसी दिए जाने का अभियान चला था.

दिल्ली बलात्कार के मुख्य अभियुक्त राम सिंह की कथित 'आत्महत्या' के बाद ट्विटर और फ़ेसबुक पर लोग इस तरह से खुशी का इज़हार कर रहे हैं कि मानों सोशल मीडिया पर मौत का जश्न मन रहा हो.

कुछ लोगों को ये अफ़सोस ज़रुर है कि राम सिंह कानूनी प्रक्रिया से बच गया.

सांसद और उद्योगपति नवीन जिंदल (@MPNaveenJindal) ट्विटर पर कहते हैं, "दिल्ली बलात्कार के मुख्य अभियुक्त ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली है. कैसे एक अति-सुरक्षित जेल ने एक अभियुक्त को कानूनी प्रक्रिया से बचने का मौका दे दिया."

वहीं फ़राह खान अली (‏@FarahKhanAli)ट्विटर पर लिखती हैं, "राम सिंह की आत्महत्या की ख़बर अच्छी है. उम्मीद करती हूं कि बाकी अभियुक्त भी ऐसा ही करें, क्योंकि कानून अपना वक्त ले रहा है. चलो पीछा छूटा."

राम सिंह की कथित आत्महत्या के मामले में दुनिया भर से लोग ट्वीट कर रहे हैं.

नाइजेल ब्रिटो(‏@NigelBritto)लिखते हैं, "राम सिंह ने तिहाड़ में फांसी लगाई. मुझे लगता है कि जेल में होने वाली सभी आत्महत्याओं को हिरासत में हुई मौत माना जाना चाहिए जब तक कि उनकी मौत आत्महत्या साबित ना हो."

आरओएलएफ इंडियन (‏@Rolfindian)नाम से ट्विटर अकाउंट पर लिखा गया है, "मुझे लगता है कि ट्विटर को चाहिए कि ऐसे कदम उठाए जाएं कि ट्विटर पर राम सिंह के लिए सदभावना लहर ना फैल जाए."

वहीं सुचेता दलाल(@suchetadalal) कहती हैं, "राम सिंह को महिमामंडित करने की कोई ज़रुरत नहीं है जैसा की टीवी पर किया जा रहा है. उसने अपने आप को मार लिया. एक जांच हो जाने दो लेकिन इस ख़बर को बंद करो."

मीना कांडासामी(@meenakandasamy) कहती हैं, "क्या अति-सुरक्षित जेल परिसर में आत्महत्या एक नई मौत की सज़ा बनकर उभरेगा."

आम आदमी (@aam_aadmee) के नाम से ट्विटर पर लिखा गया है, "राम सिंह द्वारा तिहाड़ जेल में आत्महत्या किया जाना दिखाता है कि अभियुक्त भी देर से आने वाले फैसलों से हताश हैं."

वहीं बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर भी लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.

बीबीसी हिंदी पाठक ललित बिष्ट कहते हैं, "जो हुआ अच्छा हुआ, बाकी बचे पांचों लोगों को भी ऐसा ही करना चाहिए और ये केस खत्म कर देना चाहिए."

राजेश ठाकुर कहते हैं,"राम सिंह कोई खास व्यक्ति नहीं था, वो एक..... था, शर्म के मारे मर गया होगा और जिंदगी भर तड़पने से बच गया."

मनीष केलकर लिखते हैं, "अगर ये समाचार सही है तो फिर से राम सिंह ने कानून को अपने जूते की नोक पर रखकर उछाल दिया. वो जिया अपने अंदाज़ से और मरा भी. भारत का कानून उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाया."

वहीं आशीष सिंह राजपूत कहते हैं, "सरकार से उसे कोई उम्मीद नहीं थी कि फांसी मिलेगी. तो उसने खुद ही सज़ा देना उचित समझा."

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