सिविल सेवा परीक्षा नियमों में बदलावों पर रोक

  • 15 मार्च 2013

सिविल सेवा की परीक्षा में अँगरेज़ी को ज़्यादा अहमियत देने संबंधी विवादास्पद अधिसूचना को सरकार ने फ़िलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.

कार्मिक मामलों के मंत्री वी नारायणसामी ने लोकसभा में ये जानकारी दी. सरकार ने पाँच मार्च को इस बारे में अधिसूचना जारी की थी मगर उसके बाद से लगातार इस फ़ैसले का विरोध हो रहा था.

लोकसभा में भी इस पर हंगामा हुआ जिसके बाद नारायणसामी ने ये जानकारी सदस्यों को दी.

जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव ने इस फ़ैसले को 'असंवैधानिक' बताते हुए इसके लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों को सज़ा देने की माँग की. इतना ही नहीं उन्होंने संघ लोकसेवा आयोग के प्रमुख को बर्ख़ास्त करने और उनके विरुद्ध महाभियोग चलाने की भी माँग की.

अधिसूचना को हटाने की माँग करते हुए राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू प्रसाद और उनके सहयोगी रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी संसद में हंगामा किया.

इस पर लगभग एक घंटे चली बहस के बाद नारायणसामी ने कहा कि सरकार ने सदस्यों की राय पर ध्यान दिया है. उनका कहना था, "सरकार इस बारे में चर्चा और मसला सुलझाने के लिए संघ लोकसेवा आयोग की एक बैठक बुलाएगी. इस बीच हमने फ़िलहाल इसे स्थगित कर दिया है. यथास्थिति बरक़ररार रखी जाएगी."

इससे पहले समाजवादी पार्टी, राजद, वामपंथी दलों, अकाली दल, नेशनल कांफ़्रेंस, अन्नाद्रमुक और द्रमुक के सदस्यों ने इस मसले पर काफ़ी हंगामा मचाया.

सदस्यों की ओर से 'अँगरेज़ी में काम न होगा, फिर से देश ग़ुलाम न होगा', 'अँगरेज़ी हटाओ, देश बचाओ', 'यूपीएससी का ग़लत निर्णय, वापस लो-वापस लो' जैसे नारे लगे.

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