नीतीश कुमार का 'विशेष राज्य' आख़िर है क्या ?

नीतीश की दिल्ली रैली
Image caption जब से दिल्ली में नीतीश कुमार ने अपनी इस मांग को लेकर रैली की है, इस मुद्दे ने सबका ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच लिया है.

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है. जब से दिल्ली में नीतीश कुमार ने अपनी इस मांग को लेकर रैली की है, इस मुद्दे ने सबका ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच लिया है. आइए जानते है कि राज्यों से जुड़ा ये विशेष दर्जा है क्या? और यह दर्जा किसी खास राज्य को क्यों और कैसे मिलता है?

सीधा-सा सवाल है कि विशेष श्रेणी यानि स्पेशल कैटेगरी वाला दर्जा हासिल हो जाने से किसी राज्य को ऐसा क्या ख़ास फ़ायदा मिल जाता है ?

मोटे तौर पर कहें तो इस के चार बड़े फ़ायदे होते हैं, जिनमें कर या शुल्क संबंधी रियायतें और क़र्ज मुक्त केंद्रीय सहायता -वृद्धि सबसे प्रमुख हैं.

करों में राहत

विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों में निजी पूंजी निवेश के तहत अगर कोई उद्योग या कल-कारखाना लगाना चाहे, तो उसे उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, आय कर, बिक्री कर और कॉरपोरेट टैक्स जैसे केन्द्रीय करों में विशेष छूट मिलती है.

ज़ाहिर है कि करों में ऐसी रियायतों से उस राज्य में पूंजी निवेश का आकर्षण बढ़ जाता है. इस कारण रोज़गार के अवसर वहां ज़्यादा पैदा होते हैं .

विशेष केंद्रीय सहायता

केंद्र अपनी विभिन्न योजनाओं के मद में राज्यों को वित्तीय मदद देता है. इस सहायता में 70 प्रतिशत ऋण के रूप में और 30 प्रतिशत मदद के रूप में होता है.

लेकिन जिस राज्य को विशेष दर्जा मिला हुआ है, उसे मात्र 10 प्रतिशत ही क़र्ज़ के रुप में और बाक़ी 90 प्रतिशत की वित्तीय मदद बतौर अनुदान मिल जाती है.

मतलब ये हुआ कि स्पेशल कैटेगरी वाले राज्य को मिलने वाली केन्द्रीय सहायता में सीधे 60 प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है.

राज्य पर बोझ कम

Image caption आम धारणा है कि राजनीतिक लाभ लेने जैसी मंशा के तहत भी किसी पिछड़े राज्य का सत्ता-नेतृत्व ' विशेष राज्य ' की मांग उछालता है.

केन्द्रीय योजनाओं में राज्य की देनदारी बहुत कम हो जाने से जो बचत होती है, उसका इस्तेमाल राज्य सरकार अपनी योजनाओं के लिए कर पाती है.

इसी बहाने राज्य की आधारभूत संरचनाओं यानी सड़क और बिजली के क्षेत्र आदि में विकास का मौक़ा मिल जाता है.

आम धारणा है कि राजनीतिक लाभ लेने जैसी मंशा के तहत भी किसी पिछड़े राज्य का सत्ता-नेतृत्व ' विशेष राज्य ' की मांग उछालता है. यह एक विवाद का मुद्दा है.

कहते हैं, अपने शासन-सामर्थ्य के बूते राज्य को आर्थिक रूप से उन्नत नहीं कर पाने जैसी विफलता को ' विशेष दर्जा ' वाली केन्द्रीय सहायता से ढंकने की कोशिश की जाती है.

इन दिनों राजनीतिक हलकों में बिहार के संदर्भ में विपक्ष ऐसी ही चर्चाएं कर रहा है.

मापदंड

किसी राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा दिए जाने की कई शर्तें निर्धारित की गई हैं.

जैसे कि वह राज्यः

. दुर्गम इलाक़े वाला पर्वतीय भू-भाग हो.

. अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हो.

. प्रति व्यक्ति आय और गैर कर राजस्व काफ़ी कम हो.

. आधारभूत ढांचा का घोर अभाव हो.

. जनजातीय आबादी की बहुलता हो लेकिन आबादी का घनत्व कम हो.

देश के 11 राज्य इस श्रेणी में आते हैं– अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और असम. नीतीश ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान पर बड़ी रैली कर साफ कर दिया है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया गया तो 2014 में वह लेकर रहेंगे.