'डीएमके का हटना यूपीए के लिए गंभीर संकट है'

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Image caption डीएमके ने यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान किया है

डीएमके के यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस लेने पर अंग्रेज़ी समाचार पत्र 'टेलीग्राफ' की राजनीतिक संपादक राधिका रामासेशन का कहना है कि यह सरकार के लिए गंभीर संकट है.

वे कहती हैं, ''कुछ लोग इसे मज़ाक कह रहे हैं और डीएमके वापस आ जाएगी लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता.''

उनका कहना है, ''वो मुद्दों की तलाश में थे. उनको एक भावनात्मक मुद्दा मिल गया है. यूपीए 2 को समर्थन देने के बाद डीएमके का गिरावट हुआ था उससे वो उभर नहीं पा रही थी. यह एक भावनात्मक मुद्दा है जिसपर उन्हें फायदा मिल सकता है.''

राधिका रामासेशन कहती हैं कि डीएमके के नेताओं का मानना था कि यूपीए में रह कर डीएमके को राजनीतिक नुकसान हो रहा था.

''उदाहरण के तौर पर जयललिता सरकार ने तमिल नाडु में बस किराए बढ़ाए हैं. लेकिन जब भी डीएमके यह मुद्दा उठाती थी तो लोग वापस कहते थे कि पार्टी भी तो उस सरकार का समर्थन कर रही है जो घड़ी घड़ी पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ा रही थी.''

राधिका का मानना है कि वो पूरे विश्ववास से जयललिता सरकार के खिलाफ सरकार पर आक्रमण नहीं कर पा रही थी, इसलिए वो यूपीए2 से जल्द से जल्द नाता तोड़ना चाहती थी ताकि वो राजनीति में फायदा उठा पाएं.''

सरकार पर असर

तो इसका यूपीए सरकार पर क्या असर होगा?

राधिका का मानना है, ''यूपीए सरकार पूरी तरह सपा और बसपा पर निर्भर हो गई है. घटानक्रम सीबीआई केसों से आगे निकल चुका है.सपा मुसलमान के आरक्षण का मुद्दा बड़े जोर शोर से उठाएगी. वो विधान सभा में इस पार प्रस्ताव पारित करने जा रहा है जो जल्द ही केंद्र में आ जाएगा.''

बहुजन समाज पार्टी के बारे में उनका मानना है, ''बसपा एससी/एसटी के पदोन्नति के विधेयक को लोक सभा में पारित कराने के लिए जोर डालेगी जिसका समाजवादी पार्टी विरोध कर रही है. यूपीए के लिए समस्या होगी कि वो किसे खुश रखें.''

दिखावा?

क्या डीएमके यह दिखावे के लिए कर रही है तो राधिका का मानना है कि उसके लिए समय निकल चुका है क्योंकि अगले लोक सभा चुनाव के लिए एक साल रह गया है.

राधिका कहती हैं, ''इसलिए उसे दिखावे से कुछ हासिल होने वाला नहीं. डीएमके के नेताओं का मानना था कि जितना जल्दी वो इससे बाहर हो उतना ही अच्छा है.डीएमके नेता ममता बनर्जी की भी तारीफ करते रहे हैं कि वो सही समय पर यूपीए सरकार से निकल गईं और अपनी राजनीतिक परिकलन सही ढंग से कर पा रही है."

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