"यूपीए सरकार को ख़तरा नहीं"

  • 20 मार्च 2013
Image caption डीएमके के समर्थन वापसी से केंद्र सरकार को कोई ख़तरा नहीं

कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की बड़ी सहयोगी पार्टी, डीएमके ने सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद सरकार कोई ख़तरा नहीं है. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने प्रेस कांफ्रेंस में इसकी जानकारी दी.

कमलनाथ ने कहा, "सरकार स्थिर है. इसको लेकर कोई शक या शंका नहीं होनी चाहिए. किसी ने हमारी बहुमत को चुनौती नहीं दी है और हम अपना काम जारी रखेंगे."

हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने आज सुबह कहा है कि कांग्रेस को ग ठबंधन धर्म नहीं मालूम है और वे सहयोगी दलों को साथ लेकर नहीं चल पा रहे हैं. इस मुद्दे पर कमलनाथ ने कहा, "हम बीते नौ साल से गठबंधन सरकार चला रहे हैं. मतभेद भी रहे हैं लेकिन हम सरकार चला रहे हैं. "

प्रस्ताव पर आम सहमति नहीं

वहीं दूसरी ओर इस संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में ये बात भी साफ हुई कि सरकार अभी तक श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन के ख़िलाफ़ पेश होने वाले प्रस्ताव पर आम सहमति नहीं बना पाई है.

कमलनाथ ने कहा, “हमने संशोधन पर सहयोगी दलों से जानना चाहा कि इसमें किन किन मुद्दों को शामिल किया जाए. इस पर हम बात कर ही रहे थे कि डीमएके ने सार्वजनिक से रुप से अपना रुख बता दिया.”

कमलनाथ ने बताया कि आम दलों के सहमति से जो बात सामने आएगी उसे वे कैबिनेट की कोर समूह के सामने रखेंगे और ये समूह ही इस प्रस्ताव पर अंतिम फ़ैसला लेगी.

इस मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "कांग्रेस पार्टी इंदिरा जी और राजीव जी के समय से श्रीलंकाई तमिल और उनके अधिकारों के प्रति सजग रहे हैं."

चिदंबरम ने ये भी कहा कि सरकार श्रीलंकाई में तमिल के मुद्दे पर सरकार के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है. उन्होंने कहा, "सरकार के प्रस्ताव पर डीएमके पहले सहमत थी, लेकिन डीएमके ने 18 मार्च की रात से लेकर 19 मार्च की सुबह के बीच में अपने रुख बदल लिया."

यूएन में संशोधन प्रस्ताव

डीएमके ने यूपीए सरकार से मांग की थी कि श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघनके खिलाफ़ पेश होने वाले प्रस्ताव को और कड़ा किए जाए और श्रीलंकाई तमिलों के खिलाफ हुए युद्ध अपराधों की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की जाए.

मंगलवार देर शाम पार्टी के वरिष्ठ नेता टीआर बालू ने राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें समर्थन वापसी का पत्र सौंपा. डीएमके के मंत्री आज प्रधानमंत्री को अपने इस्तीफ़े सौंप रहे हैं.

लेकिन पी चिदबंरम के मुताबिक सरकार का प्रस्ताव काफी सख्त है. उन्होंने अपील करते हुए कहा, "डीमएके को समर्थन वापसी के अपने फ़ैसले पर विचार करना चाहिए."

शुक्रवार को अमरीका, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में श्रीलंका में 26 साल चले गृह युद्धके दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाला है.

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि भारतीय प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग की इस बैठक में शामिल होगा और संशोधन प्रस्ताव पेश करेगा. हालांकि सरकार की ओर से ये भी कहा गया है कि वे ये प्रस्ताव डीएमके के चलते नहीं ला रहे हैं.

इस प्रेस कांफ्रेंस में केंद्रीय सूचना मंत्री मनीष तिवारी भी मौजूद थे.

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