जिस एके-56 ने बदल दी संजय दत्त की ज़िंदगी!

संजय दत्त
Image caption संजय दत्त ने फिल्मों में कई बार खलनायक की भूमिका निभाई है

सुनील और नरगिस दत्त के साहबज़ादे संजय दत्त की फिल्मों में भूमिकाएं जितनी नाटकीय और भयावाह रही है, शायद उतनी ही असल ज़िन्दगी में भी.

1993 बम विस्फोटों में कोर्ट ने याकूब मेनन की फांसी की सज़ा को बरकरार रखा है. कोर्ट ने फ़िल्म स्टार संजय दत्त को पांच साल जेल की सज़ा दी है, जिसका मतलब है कि उन्हें जेल जाना होगा.

(1993 विस्फोट: याकूब को फांसी, संजय को जेल)

रॉकी फ़िल्म से बॉलीवुड का सफ़र शुरू करने वाले संजय दत्त पले-बढ़े तो मुंबई के नामचीन पाली हिल इलाके में लेकिन खुद उन्ही के मुताबिक़, "उनकी संगत दूसरों से ज़रा अलग रही".

(तस्वीरों में संजय दत्त: 1993 से 2013 तक)

अपनी पहली फ़िल्म की कामयाबी के कुछ ही साल बाद संजय दत्त को ड्रग्स की लत लग चुकी थी और खुद संजय ने इस बात को स्वीकार किया है कि उन दिनों कैंसर से जूझ रहीं उनकी माँ नरगिस की लंबी बीमारी का भी उनपर ख़ासा असर पड़ा था.

संजय दत्त ने तमाम साक्षात्कारों में इस बात को स्वीकार किया है कि उनकी पहली फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले उनकी माँ के निधन ने उन पर गहरी छाप छोड़ी.

बहराल, उनके पिता सुनील दत्त ने ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया संजय को ड्रग्स की लत से पीछा छुडवाने में.

सुनील दत्त उन्हे इलाज के लिए अमरीका में एक नशा उन्मूलन केंद्र ले गए जहाँ लंबे इलाज के बाद संजय दत्त ने ड्रग्स को अलविदा कहा और दोबारा बॉलीवुड में काम शुरु किया.

इसी के कुछ वर्ष बाद संजय की मुलाक़ात हुई अभिनेत्री ऋचा शर्मा से जो उम्र में उनके बराबर ही थीं और दोनों ने जल्द ही शादी भी कर ली.

सपने चकनाचूर

संजय की निजी ज़िन्दगी में एक भूचाल तब आया जब उनकी पुत्री त्रिशाला दत्त के जन्म के कुछ ही दिन बाद उनकी पत्नी ऋचा को ब्रेन कैंसर हो गया और उन्हें भी अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में एक लम्बे इलाज से गुज़रना पड़ा.

यहाँ पर भी संजय की किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और ऋचा शर्मा-दत्त की एक लम्बी बीमारी के बाद मौत हो गई.

संजय दत्त ने इस बीच बॉलीवुड में अपने कदम फिर से जमाने शुरू कर दिए थे और पत्नी की मौत के बाद उन्होंने फिर से अपने करियर पर पूरा दांव लगा दिया.

(बीबीसी ने यह इंटरव्यू 2012 में इनकी फ़िल्म डिपार्टमेंट के पहले किया था)

1989 से लेकर 1993 तक संजय दत्त ने एक के बाद एक हिट फिल्में दीं जिनमे थानेदार, साजन, सड़क और खलनायक शामिल थीं.

लेकिन उनकी दुनिया तब बदल गईं जब 1993 के मुंबई बम धमाकों में उनका नाम लिया जाने लगा और मॉरिशस में आतिश फ़िल्म की शूटिंग रोक कर उन्हें मुंबई पूछताछ के लिए बुलाया गया और हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार भी कर लिया गया.

पूछताछ के दौरान संजय दत्त ने कथित तौर पर इस बात को स्वीकार किया था कि अबू सालेम जनवरी 1992 में मैग्नम विडियो कंपनी के मालिकों समीर हिंगोरा और हनीफ कड़ावाला साथ उनके घर आए थे.

इन तीनों लोगों को माफिया डॉन दाउद इब्राहिम का नजदीकी बताया गया था और मुंबई हमलों की साज़िश रचने का आरोप दाउद पर लगाया गया था.

एके-56 का सच

Image caption बॉलीवुड में संजय दत्त अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं.

हालांकि मुक़दमे की सुनवाई के दौरान संजय दत्त ने अपना इक़बालिया बयान बदल दिया.

लेकिन पहले उन्होंने अपने बयान में कथित रूप से स्वीकार किया था कि उन्होंने इन तीनों व्यक्तियों से एक एके-56 रायफल इसलिए ली थी क्योंकि मुंबई में हुए दंगों के बाद उनके प रिवार को धमकियाँ मिलीं थीं और उन्हें उनकी सुरक्षा की चिंता थी.

संजय दत्त ने कथित तौर पर इस बात को भी स्वीकार किया था कि जब मुंबई बम धमाके हुए तब वह विदेश में थे और उन्होंने अपने मित्र युसूफ नलवाला से उस रायफल को नष्ट करने के लिए कहा था.

इसी के बाद संजय दत्त को हिरासत में लिया गया था और उनपर टाडा कानून के तहत मुकदमा चलाया गया था.

संजय को अगले 18 महीने जेल में बिताने पड़े थे और तब जाकर उनकी ज़मानत हो सकी थी.

यह वही समय था जब संजय बदत्त पर फ़िल्म इंडस्ट्री के सैंकड़ों करोड़ रूपये दांव पर लगे थे और वह बॉलीवुड के टॉप सुपरस्टार गिने जाते थे.

राहत

ज़मानत पर रिहा हो जाने के कुछ दिन बाद ही संजय दत्त ने एक बार फिर से अपने करियर पर ध्यान दिया और मुन्नाभाई एमबीबीएस जैसे अनेकों हिट फ़िल्मों में काम किया.

उन्हें एक बड़ी राहत 2006 में तब मिली जब मुंबई बम धमाकों मामले की सुनवाई कर रही टाडा अदालत ने कहा कि संजय एक आतंकवादी नहीं है और उन्होंने अपने घर में ग़ैरकानूनी रायफ़ल अपनी हिफाज़त के लिए रखी थी.

इसके बाद से उन पर टाडा के आरोप ख़त्म कर दिए गए और उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत छह साल की सजा सुनाई गई.

संजय को इसके कुछ ही दिन बाद सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई और उसके करीब छह साल बाद अब अदालत अपना फैसला सुनाएगी.

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