'नौसैनिकों को भेज इटली ने राजनयिक संकट टाला'

Image caption इन दोनों नौसैनिकों पर दो भारतीय मछुआरों की हत्या करने का आरोप है. तस्वीर रॉयटर्स

इतालवी नौसैनिकों के साथ भारत आए इटली के उप विदेश मंत्री स्टीफ़न दे मिस्तूरा ने कहा है कि नौसेनिकों के भारत वापस लौटने से एक संभावित राजनयिक संकट टल गया है.

उन्होंने शुक्रवार शाम एक प्रेस वार्ता में कहा कि, "नौसैनिकों की वापसी में भारतीय अधिकारियों द्वारा लिखी चिट्ठी की प्रमुख भूमिका रही जिसमें आश्वासन दिया गया था कि इस मामले में आरोपियों को मौत की सज़ा दिए जाने की संभावना नहीं बनती है."

उन्होंने कहा कि इसी आश्वासन के बाद इटली की सरकार ने नौसैनिकों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए भारत भेजने का फैसला लिया.

उन्होंने कहा कि "इटली में मौत की सज़ा का प्रावधान बहुत कठोर है इसीलिए हमें भारत से आश्वासन लेना पड़ा. हम अभी भी मानते हैं कि नौसेनिकों का मुकदमा इटली में चलाया जाना चाहिए था."

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारत ने इटली को आश्वासन दिया कि इन दो नौसेनिकों पर मृत्युदंड की सज़ा की संभावना नहीं है और न ही इन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. एजेंसी के मुताबिक इन्हीं आश्वासनों की मदद से नौसेनिक भारत लौटे हैं और इस तरह 11 दिनों से चला आ रहा राजनयिक विवाद खत्म हो गया है.

उप विदेश मंत्री मिस्तूरा ने मांग की है कि मामले के जल्द निपटारे के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया जाए क्योंकि इटली न्याय चाहता है.

उन्होंने ये भी कहा कि इतालवी नौसेनिकों द्वारा कथित रूप से जिन दो भारतीय मछुआरों की मौत हुई है उनके परिवार के प्रति वो संवेदना प्रकट करते हैं लेकिन ये समझना होगा कि इतालवी नागरिक अपनी ड्यूटी कर रहे थे.

नौसेनिकों की वापसी

इससे पहले शुक्रवार को इटली ने अपने दो नौसैनिकों को मुकदमे का सामना करने के लिए भारत वापस भेज दिया. इन दोनों नौसेनिकों पर भारत के समुद्री तट के करीब दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है.

गुरूवार को इटली के प्रधानमंत्री ने इटली के रक्षा मंत्री और उपविदेश मंत्री से मुलाक़ात की और इस संबंध में एक बयान जारी किया.

इटली ने बयान में कहा कि भारत ने उन्हें आश्वासन दिलाया है कि दोनों नौसैनिकों के साथ अच्छा सलूक किया जाएगा और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी. बयान के अनुसार दोनों नौसैनिक भी इस फ़ैसले से सहमत हैं.

इटली सरकार के इस फ़ैसले का भारत ने स्वागत किया है.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सख़्त रवैये के कारण ही इटली को ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

भारत ने पिछले महीने इटली में आम चुनाव में मतदान करने के लिए इन दोनों को अपने देश जाने की इजाज़त दी थी.

जब इतालवी नौसैनिकों को कुछ समय के लिए अपने देश जाने की इजाज़त दी गई थी, तब इटली के राजदूत ने लिखित में वायदा किया था कि वे उन पर चल रहे मुकदमे का सामना करने भारत लौट आएंगे.

लेकिन बाद में मुकरते हुए इटली ने अपने नौसैनिकों का पक्ष लेते हुए कह दिया था कि उन्हें वापस भारत नहीं भेजा जाएगा.

इससे दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद और गहरा हो गया था.

उसके बाद भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इटली के राजदूत डेनियल मंचिनी को भारत न छोड़ने का आदेश दिया था. जबकि इतालवी राजदूत ने दलील दी थी कि वियना कन्वेन्शन के तहत उनके खिलाफ राजनयिक तौर पर कोई कदम नहीं उठाया जा सकता.

मामला

इटली के सैनिकों पर आरोप है कि एक साल पहले केरल के समुद्र तट के निकट उन्होंने दो भारतीय मछुआरों को गोली मार दी थी. ये सैनिक इटली के एक जहाज़ पर तैनात थे ताकि उसे समुद्री लुटेरों से बचा सकें.

Image caption भारत की सुप्रीम कोर्ट ने इटली के राजदूत को भारत छोड़ने से मना किया था.

नौसैनिकों का कहना है कि उन्होंने हिंद सागर में भारतीय मछुआरों को समुद्री लुटेरे समझ कर उन पर गोलियां चला दीं थी.

हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुए दोनों इतालवी नौसैनिकों को पिछले साल भारत में हिरासत में ले लिया गया था.

इटली में आम चुनाव में मतदान करने के लिए इन दोनों को अपने देश जाने की अनुमति मिली थी.

इससे पहले दिसंबर 2012 में भी उन्हें क्रिसमस मनाने के लिए इटली जाने की अनुमति मिली थी जिसके बाद वे भारत लौट आए थे. तब केरल हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार दोनों इतालवी नौसैनिकों ने छह करोड़ रुपये की बैंक गांरटी दी थी और दो हफ्तों के भीतर भारत वापस आने का लिखित आश्वासन दिया था.

मछुआरों के परिवारवालों से हुए एक समझौते के तहत इटली की सरकार ने मारे गए दोनों मछुआरों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की घोषण की थी, लेकिन अब ये मामला दोनों देशों के बीच एक राजनयिक विवाद का रूप ले चुका है.

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