तमिलों के मुद्दे पर सांसद नाराज़, गुस्सा उतरा माइक पर

संसद
Image caption तमिलों के मुद्दे पर हंगामा करनेवाले सांसद तमिलनाडु के थे.

श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में हुए हंगामें के दौरान तमिलनाडु के कुछ सांसदों ने सभापति की टेबल के दो माइक तोड़ दिए.

राज्यसभा में शुक्रवार को हुए शोर-शराबे के दौरान डीएमके और एआईडीएमके के सांसदों ने सभापति की कुर्सी के सामने पहुंचकर हंगामा किया.

ये सांसद इस बात को लेकर नाराज़ थे कि सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका के खिलाफ़ प्रस्ताव की भाषा को और कड़ा करने की कोशिश नहीं की.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका में हुए गृह युद्ध के दौरान मानवाधिकारों के हनन से जुड़े अमरीकी प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है.

इस प्रस्ताव में श्रीलंका से कहा गया है कि वो अपने यहां गृह युद्ध के अंतिम चरण में हुए मानवाधिकारों के गंभीर हनन की जांच करे.

प्रस्ताव के समर्थन में 25 वोट पड़े जबकि विरोध में 13 वोट. आठ सदस्य देश मतदान की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए.

विरोध

Image caption श्रीलंका के तमिलों के मुद्दे पर तमिलनाडु में कुछ दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं.

भारत ने भी इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया. भारत ने पड़ोसी श्रीलंका से कहा है कि वो मानवाधिकारों के हनन के मामलों की “स्वतंत्र और विश्वसनीय” जांच कराए.

इससे पहले शुक्रवार सुबह राज्यसभा में जैसे ही सभापति हामिद अंसारी आए, वी मैत्रीयन की अध्यक्षता में एआईएडीएमके सांसद वेल में आ गए और तमिल विद्रोही संगठन यानि एलटीटीई के प्रमुख प्रभाकरन के बेटे के पोस्टर को लेकर घुटनों के बल बैठ गए. इन सांसदों का आरोप है कि प्रभाकरन के बेटे की मौत तमिल सेना के हाथ हुई थी.

हालांकि इस बीच सभापति ये कोशिश करते रहे कि सदन की कार्यवाही चले, लेकिन ये नाराज़ सांसद पोस्टर लिए बैठे रहे और संसद की कार्यवाही को बाधित करते रहे.

लेकिन दोपहर के भोजन के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई थी तो सभापति का कार्यभार संभाल रही रेणुका चौधरी ने विरोध कर रहे सांसदों के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की जिसके बाद ये सांसद और भड़क गए.

पूरे हंगामे के दौरान तमिलनाडु के कांग्रेस सदस्य भी नारे लगाते रहे कि उनकी पार्टी ने हमेशा तमिलों के मुद्दे का समर्थन किया है.

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