आपसी भिडंत में 15 माओवादी मारे गए

Image caption झारखंड में माओवादी और उनसे टूटकर अलग हुए धड़ों के बीच झड़पें होती रहती हैं

झारखण्ड में माओवादियों और उनसे अलग हुए धड़ों के बीच झड़प में 15 माओवादियों के मारे जाने की ख़बर है.

राज्य पुलिस ने यह दावा किया है.

झारखण्ड के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार के अनुसार चतरा जिले में बुधवार की देर रात दोनों गुटों के बीच जमकर गोलीबारी हुई.

उन्होंने कहा कि दस माओवादियों के शवों को लकड़मंदा गाँव के पास से बरामद किया गया है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "बरामद किए गए शवों में से नौ वर्दीधारी हैं जबकि एक सादे कपड़ों में है. हमें अंदेशा है कि इस झड़प में 15 से ज्यादा माओवादी छापामार मारे गए हैं."

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पुलिस ने खदेड़ा, विरोधियों ने मारा

पुलिस के अनुसार पिछले बीस दिन से चतरा और इसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बालों ने माओवादियों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ रखा था. सुरक्षा बलों के दबाव की वजह से माओवादी छापामार झारखण्ड की सीमा से बिहार की तरफ पलायन कर रहे थे.

इसी दौरान बुधवार की रात ‘तृतीय प्रस्तुति कमिटी’ नाम के संगठन के हथियारबंद दस्ते से माओवादियों की झड़प हो गई जो बृहस्पतिवार सुबह तक चली.

गुरुवार की दोपहर कुछ पत्रकारों और मीडिया कार्यालयों में ‘तृतीय प्रस्तुति कमिटी’ के नाम से किए गए फ़ोन में यह दावा किया गया कि झड़प के बाद कमिटी ने लगभग 15 माओवादी छापामारों को बंधक बना लिया है.

इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है.

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि जिस जगह से माओवादियों के शव मिले हैं वहां से पुलिस ने हथियारों का जखीरा भी बरामद किया है. इसमें एके-47, कार्बाइन और राइफलें शामिल हैं.

कई धड़े सक्रिय

झारखण्ड के कई इलाकों में माओवादियों से अलग हुए कई धड़े सक्रिय हैं और इनमें आपस में झड़पें होती रहती हैं. इन गुटों को चलाने वाले कभी माओवादी छापामार हुआ करते थे.

आरोप हैं कि मोवादियों के कई कमांडरों ने पैसे लेकर खुद को संगठन से अलग कर लिया और अपना अलग गुट बना लिया. तृतीय प्रस्तुति कमिटी के अलावा कई और धड़े हैं जो माओवादियों से अलग हुए हैं जैसे झारखण्ड लिबेरेशन टाइगर, झारखण्ड प्रस्तुति कमिटी आदि.

पिछले साल माओवादियों ने अपने से अलग हुए धड़ों के साथ एक तरफ़ा युद्धविराम की घोषणा की थी. मगर दो महीने के अंदर ही इनके बीच झड़पें फिर शुरु हो गईं.

बार-बार ये आरोप लगे हैं कि माओवादियों से टूट कर अलग हुए धड़ों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है. इस आरोप का झारखण्ड पुलिस के अधिकारी खंडन करते हैं.

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