युद्ध अपराधियों के समर्थन में कोलकाता में रैली

Image caption बांग्लादेश में दोषी क़रार दिए गए लोगों के समर्थन में कोलकाता में रैली

बांग्लादेश में 1971 के मुक्ति आंदोलन के दौरान युद्ध अपराध के लिए दोषी पाए गए नेताओं के समर्थन में बांग्लादेश के अलावा भारत में भी प्रदर्शन हो रहे हैं.

बांग्लादेश में 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना का साथ देने और दूसरे मामलों में युद्ध अपराध के दोषी पाए गए जमात-ए-इस्लामी नेता दिलावर हुसैन सईदी के समर्थन में बुलाई गई एक दिन की हड़ताल के दौरान कुछ छिट पुट हिंसक घटनाओं हुई.

जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिविर ने उत्तरी बांग्लादेश के राजशाही और रंगपुर डिविज़न के 16 ज़िलों में बुधवार को एक दिन के बंद का आह्वान किया था.

उनकी मांग है कि दिलावर हुसैन सईदी को तत्काल रिहा किया जाए.

इस बीच दिलावर हुसैन सईदी के समर्थन में भारत के कोलकाता शहर में भी कुछ मुस्लिम संगठनों ने शनिवार तीस मार्च को एक रैली का आयोजन किया था.

कोलकाता के शहीद मिनार में इस रैली का आयोजन ऑल बंगाल माइनॉरिटि युथ फ़ेडरेशन समेत लगभग 15 मुस्लिम संगठनों ने संयुक्त रूप से किया था.

फ़ेडरेशन के महासचिव मोहम्मद क़मरुज़्ज़मा ने बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में कहा कि जमात-ए-इस्लामी के नेता दिलावर हुसैन सईदी की मौत की सज़ा को बांग्लादेश सरकार माफ़ करे और उनको रिहा किया जाए.

ग़ौरतलब है कि बांग्लादेश में युद्घ अपराधों की जाँच के लिए गठित ट्रिब्यूनल ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेता दिलावर हुसैन सईदी समेत कई नेताओं को 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्घ अपराधों के लिए सज़ा सुनाई है.

सईदी को 1971 में मुक्ति संग्राम में जनसंहार, बलात्कार और अन्य अपराधों का दोषी क़रार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई गई है जबकि कई अन्य नेताओं को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

'राजनीतिक साज़िश'

लेकिन मोहम्मद क़मरुज़्ज़मा के अनुसार दिलावर हुसैन सईदी दर असल एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इस्लामी विद्वान हैं और सरकार ने राजनीतिक कारणों से उन्हें एक साज़िश के तहत उन्हें फंसाया है.

क़मरूज़्ज़मा के मुताबिक़ दिलावर हुसैन सईदी को जिन अपराधों का मुजरिम क़रार दिया गया है वो उन्होंने नहीं बल्कि दिलावर सिकदर नाम के एक व्यक्ति ने किया था लेकिन शेख़ हसीना की मौजूदा सरकार उन्हें जानबूझकर फंसा रही है.

उनके अनुसार ट्रिब्यूनल निष्पक्ष तौर पर काम करने के बजा़ए सरकार के दबाव में काम कर रही है. उन्होंने मांग की है कि इसमें भारत और ब्रिटेन के न्यायधीशों को शामिल किया जाए.

बांग्लादेश के शाहबाग़ में हज़ारों प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्वाई की मांग करते हुए क़मरूज़्ज़मा ने कहा कि वहां जमा लोग अपने ब्लॉग के ज़रिए इस्लाम के पैंग़बर के ख़िलाफ़ कथित अपशब्द कह रहे हैं और उनका अपमान कर रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि शाहबाग़ में हज़ारों लोग पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं. उनकी मांग है कि 1971 में युद्ध अपराध के दोषी पाए गए लोगों को मौत की सज़ा दी जानी चाहिए.

क़मरूज़्ज़मा ने कहा कि उनका संगठन दिलावर हुसैन सईदी के पक्ष में हस्ताक्षर अभियान चला रहा है और दस लाख लोगों के हस्ताक्षर लेने के बाद वे लोग भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को एक ज्ञापन देंगे जिसमें बांग्लादेश में लिखे जा रहे ब्लॉग पर भारत में प्रतिबंध लगाने की मांग करेंगे.

हिंसक प्रदर्शन

इस बीच बांग्लादेश में कई जगह हिंसक प्रदर्शन जारी है और अब तक 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

ग़ौरतलब है कि बांग्लादेश पहले पाकिस्तान का हिस्सा था जिसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था लेकिन 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने पाकिस्तान से अलग होने के लिए आंदोलन किया जिसे पाकिस्तानी सेना ने कुचलने की कोशिश की थी. लेकिन भारत के सैन्य हस्तक्षेप के बाद उन आंदोलनकारियों ने आख़िरकार सफलता पाई और इस तरह बांग्लादेश के रूप में एक नए देश का गठन हुआ.

इस विशेष अदालत का गठन 2010 में मौजूदा सरकार ने किया था. इसका मक़सद 1971 में मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर इस आंदोलन को कुचलने की कोशिश में शामिल रहे लोगों पर मुकदमा चलाना है.

लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये ट्रिब्यूनल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है. जमात और बीएनपी का आरोप है कि सरकार ने राजनीतिक बदला लेने के लिए इस ट्रिब्यूनल का गठन किया है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान 30 लाख से अधिक लोग मारे गए थे.

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