कौन हैं मोंटेक सिंह अहलूवालिया

मोंटेक सिंह अहलूवालिया
Image caption कई अहम पदों पर रह चुके हैं अहलूवालिया

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भारत में 1980 के दशक से लेकर अब तक जारी आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया से नदजीकी तौर पर जुड़े रहे हैं.

पिछले नौ साल से वो योजना आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर देश के लिए नीतियां निर्धारित करने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं.

मोंटेक सिंह अहलूवालिया के साथ लीजिए बीबीसी के लाइव चैट में हिस्सा

कई बार अपने बयानों को लेकर वो विवादों में भी रहे हैं. एक बार उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में हर महीने 859.6 रुपए और ग्रामीण क्षेत्र में 672.8 रुपए खर्च करने वाले गरीब नहीं हैं.

योजना आयोग के दो शौचालयों की मरम्मत पर 35 लाख रुपए के खर्च को लेकर भी उन्हें आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था.

कामयाब अर्थशास्त्री

मोंटेक सिंह अहलूवालिया को आर्थिक नीति और सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.

Image caption गरीबी के मानकों को लेकर अहलूवालिया को आलोचना झेलनी पड़ी है

24 नवंबर 1943 को जन्मे अहलूवालिया ने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से की जबकि एमए और एम.फिल की डिग्री उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हासिल की.

पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने 1968 में वर्ल्ड बैंक के साथ युवा पेशेवर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. इसके बाद वे विश्व बैंक में कई अहम पदों पर रहे जिनमें आय वितरण प्रभाग के प्रमुख का पद भी शामिल है.

मोंटेक सिंह अहलूवालिया 1979 में वित्त मंत्रालय के सलाहकार के तौर पर भारत सरकार से जुड़ गए. बाद में वो प्रधानमंत्री के विशेष सचिव, वाणिज्य सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव, वित्त सचिव, योजना आयोग के सचिव और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य जैसे कई पदों पर रहे.

उन्हें 2001 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नवनिर्मित इंडिपेंडेट एवेल्युएशन ऑफिस का पहला निदेशक नियुक्त किया गया. 2004 में उन्होंने ये पद छोड़ दिया और भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली.

वो भारत की विकास अर्थव्यवस्था पर कई किताबें लिख चुके हैं. इसके अलावा भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में उनके लेख प्रकाशित होते रहे हैं.

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