मुंबई हादसा: राहत की चिंता नहीं, राजनीति शुरू

  • 5 अप्रैल 2013
Image caption मलबे में दबी जिंदगी

मुंबई के थाणे जिले के कल्याण उपनगर में एक अधूरी इमारत के गिर जाने के बाद से ही सरकारी विभागों के बीच 'ब्लेम गेम' यानी एक दूसरे को इसके लिए दोषी ठहराने का खेल शुरू हो चुका है.

कल्याण से विधायक और महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के स्थानीय नेता रमेश पाटिल का कहना है कि उन्होंने पहले ही इस बारे में प्रशासन को चेतावनी भरा पत्र लिखा था.

बकौल पाटिल उन्होंने एक सप्ताह पहले नगरपालिका आयुक्त आरए राजीव को लिखा था कि कल्याण में एक अवैध इमारत बनी है जिसमें लोग अवैध तरीके से रह रहे हैं. पाटिल के मुताबिक “मेरे पत्र लिखने के बावजूद नगरपालिका ने कोई क़दम नहीं उठाया."

उधर,आयुक्त आरए राजीव का कहना है कि ये इमारत वन विभाग की ज़मीन पर बनी थी.

उन्होंने कहा, "हमने वन विभाग को कई बार कहा था कि कि ये इमारत अवैध है और इसके खिलाफ कारवाई की जाए. हम तो ज़बरदस्ती इमारतों को गिरा नहीं सकते. ये आसान नहीं है. इसके इलावा ये भीड़ भाड़ वाला इलाका भी है जिससे खतरा ज्यादा था."

आरोप-प्रत्यारोप

हालांकि स्थानीय पुलिस आयुक्त के स्वर जरा बदले हुए हैं. उनका कहना है, “ये समय राहत पहुंचाने का है. मलबे में दबे लोगों को निकालने का है. बाद में जांच के बाद पता चलेगा इसका जिम्मेदार कौन है."

घटना से सबक सीखने के बजाय एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप मढ़ने की ये कोई इकलौती घटना नहीं है.

इस हादसे में अब तक 50 लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन कल्याण और इसके आस पास लगभग 250 और भी अवैध इमारतें हैं. खुद राजीव ने इसकी पुष्टि की है. तो क्या नगर पालिका एक और हादसे का इंतजार कर रही है!

कल्याण में रहने वाले और पेशे से जिम इंस्ट्रक्टर जुज़र अली सवाल करते हैं, “इन बड़ा सवाल ये है कि प्रशासन उस वक्त कहां सोया हुआ था जब इस सात मंजिला इमारत पर काम हो रहा था. मैंने इस इमारत को ज़मीन से ऊपर आसमान तक उठते देखा है क्योंकि मैं रोज़ दफ्तर जाते और घर लौटते समय उधर से ही गुज़रता हूं. जब कोई अवैध काम इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है तो ज़ाहिर है प्रशासन के कुछ विभागों की मिली भगत के बगैर नहीं हो सकता."

निर्माण क्षेत्र में भ्रष्टाचार

कल्याण में ही रहने वाले किरण माने ने हाल में वहां एक ऊंची ईमारत में फ़्लैट खरीदा है.

वो कहते हैं, "कल्याण और इसके आस पास कई इमारतें अवैध हैं और लोग इनमें रह रहे हैं. मैंने जब अपना फ़्लैट खरीदा तो हमें पता चला कि यहां अवैध इमारतों के निर्माण का काम बगैर रोक-टोक चल रहा है. मुझे लोगों ने बताया कि घर खरीदने से पहले ये देखना ज़रूरी है कि इसके पेपर सही हैं या नहीं."

Image caption राहत का काम जारी

केवल कल्याण ही नहीं मुंबई के बाहर मुम्बरा और मीरा रोड इलाके का भी यही हाल है. यहां सैकड़ों इमारतों का निर्माण अवैध तरीके से किया गया है.जुज़र और किरण कहते हैं कि अगर प्रशासन की मिली भगत न हो तो ये इमारतें खड़ी नहीं हो सकतीं.

कल्याण में रहने वाले एक रिटायर्ड इंजीनियर रमेश तलपडे कहते हैं कि इमारतें बनाने वाली कंपनियों, स्थानीय नेताओं और प्रशासन के कुछ विभागों के बीच एक बड़ा नेटवर्क बन गया है.

मुंबई में अब नई इमारतें बनने की की गुंजाइश नहीं है, इसलिए इन उपनगरों में नई इमारतें बनाई जा रही हैं. "सप्लाई से अधिक मांग है जिसके कारण निर्माण के क्षेत्र में भ्रष्टाचार काफी बढ़ गया है."

अब जबकि एक हादसा हो गया है तो लोगों का सवाल पूछना लाजिमी है कि इसइमारत को बनाने की इजाज़त किस ने दी थी? इमारत का नक्शा कहां पारित किया गया था?

जब इमारत के अवैध होने की जानकारी थी तो प्रशासन ने कोई क़दम क्यों नहीं उठाया? जाहिर है इन सारे सवालों का जवाब तो जांच के बाद ही मिल जाएगा लेकिन उन लोगों की जान तो वापस नहीं आएगी जिनकी इस हादसे में मौत हो चुकी है.

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