ठाणे: अभियुक्त 20 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में

ठाणे
Image caption इमारत दुर्घटना में 70 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

ठाणे में सात मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने की घटना के सिलसिलें में गिरफ़्तार दो बिल्डर और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को 20 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

रविवार दोपहर ठाणे के पुलिस आयुक्त ने एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इसकी जानकारी दी. इस मामले में अब तक कुल नौ लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

पुलिस आयुक्त रघुवंशी ने कहा कि इस इमारत को केवल तीन महीने में तैयार कर ली गई थी और इस अवैध इमारत को बनाने के लिए सरकारी धिकारियों और पार्षद को रिश्वत दी गई थी.

उन्होंने कहा कि पुलिस के पास इस सिलसिले में पुख्ता सुबूत हैं और पैसों के लेन-देन के काग़ज़ात मिलने के बाद ही पुलिस ने उन लोगों की गिरफ़्तार किया है.

इस मामले में शनिवार देर रात चार और लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद के अनुसार शनिवार देर रात गिरफ़्तार किए जाने वालों में उपायुक्त दीपक चाह्वान, नगर निगम के उपायुक्त बाला साहेब आंदले, निगम पार्षद हीरा पाटिल और पुलिस अधिकारी एएसआई सैयद शामिल हैं.

इससे पहले, शनिवार दिन में पुलिस ने बिल्डर जमील कुरैशी और सलीम शेख़ को गिरफ्तार किया था.

इस बीच इमारत के गिरने की घटना में मरने वालों की संख्या 74 हो गई है और 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

मृतकों में 26 बच्चे भी शामिल हैं. राहत एवं बचाव कार्य मे लगी एजेंसी का कहना है कि बचाव कार्य अब ख़त्म कर दिया गया है.

पढ़िए जुबैर अहमद का विश्लेषण

जाँच जारी

इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है और जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

पुलिस का कहना है कि ये एक अवैध इमारत थी और वन विभाग की ज़मीन पर बनी थी. मरने वालों में अधिकांश मजदूर हैं जो कि इमारत में ही रह रहे थे.

लोगों के अनुसार से सात मंजिला इमारत तीन महीने में तैयार की गई थी. नगर निगम के प्रमुख ने भी हाल ही में कहा था कि ठाणे में 250 अवैध इमारते हैं और मुंबई और ठाणे के बीच के इलाकों में भी अवैध निर्माण किए गए है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस मामले की जड़ें गहरी होती जा रही हैं और शहर में अवैध निर्माण के पीछे न सिर्फ अधिकारियों बल्कि स्थानीय नेताओं की मिली भगत होती है.

पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में इमारत गिरने के कई मामले सामने आए हैं. जानकारों का दावा है कि रीयल स्टेट के क्षेत्र में आए उछाल ने अवैध इमारतों के निर्माण को प्रोत्साहन दिया है.

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