भुल्लर को फ़ांसी न देने की एमनेस्टी की अपील

  • 12 अप्रैल 2013

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आशंका जताई है कि देवेंदर पाल सिंह भुल्लर को तुरंत फांसी दी जा सकती है. संगठन ने लोगों से कहा है कि वे भुल्लर को फांसी न देने के लिए अपील करें.

एमनेस्टी ने आम लोगों के नाम जारी अपील में कहा है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को हिंदी, अंग्रेजी या अपनी मातृभाषा में पत्र लिखकर भुल्लर की फांसी माफ़ करने की अपील करें.

एमनेस्टी के अनुसार भुल्लर की याचिका ख़ारिज होने का फ़ैसला 17 अन्य कैदियों के मामलों को भी प्रभावित करेगा.

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वकील तक नहीं था

संगठन कहता है कि मुकदमे की शुरुआत में भुल्लर को वकील तक उपलब्ध नहीं था. उन्हें पुलिस के सामने अपराध स्वीकार करने की वजह से दोषी ठहरा दिया गया था. बाद में उन्होंने कहा था कि उन्होंने वह बयान पुलिस के दबाव में दिया था.

मार्च 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी मौत की सज़ा को बरकरार रखा था हालांकि तीन में से एक जज ने उसे अपराधी मानने से यह कहकर मना कर दिया था कि इसके लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

इसके बाद दिसंबर, 2002 में एक पुनरीक्षण याचिका को उन्हीं जजों की बेंच ने बहुमत से खारिज कर दिया.

साल 2011 से भुल्लर का दिल्ली के एक मनोचिकित्सा संस्थान में इलाज चल रहा है. उसके वकील ने कोर्ट से उसकी मानसिक हालत के आधार पर मौत की सज़ा माफ़ करने की मांग की थी.

साल 2003 में भुल्लर ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका डाली जो 2011 में खारिज कर दी गई.

भुल्लर ने राष्ट्रपति के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जिसे 12 अप्रैल, 2013 को खारिज कर दिया गया.

यह फैसला उन 17 अन्य कैदियों के भाग्य को भी प्रभावित करेगा जिनकी दया याचिकाएं राष्ट्रपति ख़ारिज कर चुके हैं.

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