काटजूः मिर्जा गालिब को भारत रत्न क्यों नहीं?

  • 13 अप्रैल 2013
जस्टिस काटजू
Image caption काटजू ने गालिब को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है.

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमेन जस्टिस मार्केण्डेय काटजू ने कहा है कि उर्दू और फारसी के नामचीन शायर मिर्जा गालिब को देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा जाए.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने जस्टिस काटजू के हवाले से बताया, "देश में उर्दू के साथ बडी़ नाइंसाफी हुई है. लोग इस जुबान को एक खास मजहब के साथ जोड़ देते हैं. यह बांटो और राज करो की नीति है. कम ही लोग यह जानते हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने भाषण उर्दू में लिखते हैं."

काटजू बेहद तल्खी से पूछते हैं, "मेरा मानना है कि मिर्जा गालिब को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए. अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल और बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर को उनकी मृत्यु के बाद दिया जा सकता है तो गालिब को क्यों नहीं?"

उर्दू की तालीम

राजधानी दिल्ली में उर्दू शायरी के बड़े जलसे 'जश्न-ए-बहार' के आयोजन के मौके पर भारत, पाकिस्तान और दुनिया भर के शायर शिरकत कर रहे हैं.

मुशायरे में उर्दू की तालीम को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाने की आवाजें भी उठीं.

इस मौके पर उर्दू जुबान को बढ़ावा देने वाली सरकारी एजेंसी से जुड़े मशहूर शायर वसीम बरेलवी ने कहा, "वास्तव में गैर मुस्लिम परिवारों ने इस प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाई है. अब समय आ गया है कि मुस्लिम परिवार अपने बच्चों को उर्दू पढ़ने के लिए कहें."

उर्दू की तरक्की के लिए काम करने वाले कामना प्रसाद ने वसीम बरेलवी से सहमति जताते हुए कहा, "अब समय आ गया है हम साथ आकर सरकार से यह मांग करें कि उर्दू की तालीम को पांचवी कक्षा तक अनिवार्य किया जाए... हम केवल इसकी सलाह दे सकते हैं. यह हमारी जिम्मेदारी है कि हमारी आने वाली पीढ़ियां गंगा जमुनी तहजीब से परिचित हो सकें."

संबंधित समाचार