सुभाष चंद्र बोस के वंशज क्यों मिले नरेंद्र मोदी से?

मोदी
Image caption मोदी ने नेताजी के परिवारजनों को मदद की उम्मीद बंधाई.

आज़ाद हिन्द फ़ौज के संस्थापक और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाष चंद्र बोस के वंशज अगर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले तो वजह थी नेताजी के बारे में ऐसे तमाम कथित दस्तावेज़ जो अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए गए हैं.

सूत्रों के मुताबिक़ नरेंद्र मोदी इनसे बेहद गर्मजोशी के साथ मिले, इस अर्जी को ग्रहण किया और मदद करने का भरोसा भी दिलाया.

गुजरात के मुख्यमंत्री पिछले दिनों दिल्ली में एक के बाद एक भाषण देने के बाद पहुंचे थे ममता बनर्जी के शासन वाले पश्चिम बंगाल की यात्रा पर.

नरेंद्र मोदी के तमाम जन संपर्क कार्यक्रमों की तह के बीच ही लिपटी थी 9 अप्रैल को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रिश्तेदारों के साथ हुई एक अन्तरंग मुलाक़ात.

पत्र में लिखा है, "नेताजी पूरे राष्ट्र के थे, इसलिए हम आपसे प्रधानमंत्री से मांग करने की अपील करते है कि उनके भाग्य के बारे में रहस्य जानने और इस मुद्दे के लिए एक समाप्ति लाने में मदद करने के लिए सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक डोमेन में जारी करना चाहिए."

मृत्यु पर मतभेद

Image caption नेताजी के परिवार के कुल 24 सदस्यों इस चिठ्ठी पर अपने हस्ताक्षर करके मोदी को सौंपे.

मामला दरअसल ये है कि नेताजी के परिवार में उनकी मौत कब हुई और कहाँ हुई को लेकर दो धारणाएं हैं.

नेताजी की पुत्री बताई जाने वाली अनीता बोस फ़ाफ़ लगातार इस बात को दोहराती रहीं है कि सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 1945 में एक हवाई दुर्घटना में ही हुई थी.

हाल फिलहाल में इलाहबाद न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सरकार से इस बात की फिर से जांच करने को कहा था कि उत्तर प्रदेश में 1970 और 1980 के दशक में रहने वाले गुमनामी बाबा को सुभाष बोस क्यों कहा जाता रहा है.

लेकिन सुभाष चंद्र बोस की पुत्री अनीता बोस ने इस तरह की जांच को मानने से इनकार कर दिया था.

भारत सरकार इससे पहले तीन ऐसे कमीशनों का गठन कर चुकी है जिन्होंने जांच की थी कि सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु आखिर कब और कहाँ हुई.

Image caption सुभाष बोस की रहस्यमई मृत्यु पर लेखक अनुज धर की किताब ने कई सवाल खड़े किए हैं.

दो कमीशनों ने तो कहा था कि नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में ही हुई, लेकिन जस्टिस मुख़र्जी कमीशन ने जोर देकर कहा था कि उनकी मृत्यु उस विमान दुर्घटना में नहीं हुई.

पत्र

सुभाष चंद्र बोस के भाई के वंशज इस बात से इत्तेफाक रखते हैं और चाहते हैं कि कि नेताजी के बारे में उनकी मौत के पचासों साल बाद अब तक सरकारी धरोहर बने रहे गुप्त दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई सुनील बोस के बेटे डॉक्टर डीएन बोस और उनके परिवार के प्रवक्ता चंद्र बोस, जो शरत चंद्र बोस के पौत्र हैं, मोदी से मिलने पहुंचे और उन्हें अपने परिवारजनों द्वारा लिखा एक पत्र सौंपा.

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व सांसद और शरत चंद्र बोस के बेटे सुब्रत बोस, रोमा रॉय और नेताजी के परिवार के कुल 24 सदस्य शामिल हैं.

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