पाक का 'जासूस' परिंदा भारत में पकड़ा गया

बाज़
Image caption भारत-पाक सीमा पर एंटीना के साथ कोई पक्षी पहली बार मिला है.

भारत के सीमा रक्षकों ने राजस्थान के सीमावर्ती ज़िले जैसलमेर में सरहद के पास पाकिस्तान की ओर से दाख़िल हुए एक बाज़ पक्षी को निर्जीव हालत में पकड़ा है.

इस परिंदे में एक एंटीना भी लगा था. एंटीना लगा होने के कारण सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) के अधिकारी सतर्क हो गए हैं और इस बात की तहक़ीक़ात कर रहे हैं कि कही इसका इस्तेमाल जासूसी के लिए तो नहीं किया जा रहा था.

राजस्थान की कोई एक हज़ार किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से लगी है.

इसी सरहद पर सीमा रक्षकों के एक गश्ती दल को ये बाज़ जैसलमेर ज़िले में सीमा के निकट बेजान मिला.

उस समय बीएसएफ़ के जवान सरहद पर अपनी नियमित गश्त पर थे.

उस तरफ पाकिस्तान है और इस तरफ़ हिंदुस्तान. इसलिए बीएसएफ़ के मुताबिक़ बाज़ ने पाकिस्तान से उड़ान भरी और सरहद के इस पार आ गया.

यहां इस पक्षी की मौत हो गई. बीएसएफ़ के जवानों को मौक़े पर पक्षी के पंख ज़मीन पर बिखरे मिले.

इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस परिंदे ने रेगिस्तान में तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया हो.

सीएच-434 एंटीना

सीमा सुरक्षा बल के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि पक्षी के साथ दस इंच का एक एंटीना भी लगा था. इस पर सीएच-434 अंकित था.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक़ वैसे तो इस पक्षी के पाकिस्तानी क्षेत्र में शिकार में इस्तेमाल की जानकारी मिली है. लेकिन इसके साथ लगे एंटीना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

लिहाज़ा इस पहलू की भी जांच की जा रही कि कहीं इस पक्षी का जासूसी के लिए तो इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था.

ये पहला मौक़ा नहीं है जब सरहद पार से कोई बाज़ इस तरफ़ दाखिल हुआ हो.

इससे पहले भी एक बाज़ एंटीना के साथ ज़िंदा पकड़ा जा चुका है. सूत्रों ने बताया कि सीमा के उस पार अरब के रईस पाकिस्तान के मरुस्थली इलाक़े में शिकार के लिए आते है और शिकार के लिए प्रशिक्षित बाज़ का इस्तेमाल करते है.

लेकिन एक बाज़ के साथ किसी उपकरण के जुड़े़ होने से सुरक्षा बल सतर्क हो गए हैं.

इसके लिए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. जैसलमेर ज़िले में रेगिस्तान है. इस ज़िले की लगभग 480 किलोमीटर की सीमा पाकिस्तान से सटी है.

सरहद पर तारबंदी है और दोनों तरफ़ संगीनों का साया है, लेकिन ज़मीन पर सरहद तो इंसान ने बनाई है.

धरती का सीना चीर कर खिंची गई लकीर और उस पर लगी बंदिशों को परिंदे कहां मानते हैं!

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