चिट फंड कंपनी का मालिक हुआ गिरफ्तार

Image caption ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

चिट फंड कंपनी शारदा समूह के मालिक सुदीप्तो सेन गिरफ्तार कर लिए गए हैं. वे अब तक फरार थे. पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक ने बीबीसी को ये जानकारी दी. सुदीप्तो सेन को कश्मीर से गिरफ्तार किया गया. उनके साथ दो और सहयोगियों को पकड़ा गया है. उन सबको कोलकाता लाने के लिए विशेष दल कश्मीर रवाना हो चुकी है.

कंपनी के मालिक सुदीप्तो सेन कथित रूप से कई करोड़ की हेरा-फ़ेरी करने के बाद फ़रार हो गए थे. पुलिस ने उनके खिलाफ़ लुक-आउट नोटिस जारी किया था.

इसमें अपनी जमापूंजी लगाने वाले लोग अपना पैसा वापस पाने के लिए परेशान हैं.

पिछले चार दिनों में इस चिट फंड कंपनी के कम से कम दो निवेशक ख़ुदकुशी कर चुके हैं.

कई तरह के धंधे

अपनी बचत के 30,000 रुपए शारदा समूह में जमा करने वाली उर्मिला प्रमाणिक ने रविवार को आत्मदाह कर ख़ुदकुशी कर ली.

बताया जा रहा है कि समूह के एक कलेक्टिंग एजेंट ने भी आत्महत्या कर ली.

उनके परिजनों का कहना है कि वे लोगों से जमा किया गया पैसा वापस करने की स्थिति में नहीं थे और उन्हें खुद पर हमले का डर सता रहा था.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय आयोग का गठन किया है.

झारखंड, असम और अन्य उत्तर पूर्व के राज्यों में भी इसी तरह की जांच की जा रही है.

कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर समूह के मालिक की गिरफ़्तारी और निवेशकों के पैसे लौटाने की बात कही गई थी.

कोलकाता में शारदा समूह के मुख्यालय पहुंचे हज़ारों निवेशकों और कलेक्शन एजेंटों ने मुख्यमंत्री से उनका पैसा वापस दिलवाने की मांग की.

शारदा समूह के कार्यालयों में तोड़-फोड़ की गई है और बंगाल के साथ ही उत्तर पूर्व के कई राज्यों में धरने-प्रदर्शन किए जा रहे हैं.

लोगों से अवैध रूप से पैसा जमा करने के अलावा शारदा समूह रियल एस्टेट और मीडिया में भी सक्रिय था. समूह कई अंग्रेज़ी, बंगाली, हिंदी, उर्दू के अख़बार-मैगज़ीन प्रकाशित करने के साथ ही तीन बंगाली टीवी चैनल भी चलाता था.

टीएमसी से नज़दीकी

सभी अख़बार और टीवी तृणमूल कांग्रेस की नीतियों का पुरज़ोर समर्थन करते थे और दरअसल पार्टी और सरकार के प्रवक्ता ही बन गए थे.

गुस्साए निवेशकों और एजेंट्स का कहना है कि कंपनी अधिकारी जताते थे कि उन्हें ममता बनर्जी का वरदहस्त प्राप्त है. और ममता सरकार के कई मंत्री और कम से कम एक सांसद कंपनी से सीधे जुड़े हुए थे.

हाल ही तक टीएमसी सांसद कुणाल घोष शारदा समहू के मीडिया बिज़नेस के सीईओ थे.

लेकिन ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नेताओं के शारदा समूह से किसी भी तरह के संबंधों से इनकार किया है.

उन्होंने राज्य में संदिग्ध चिट फंड कंपनियों के विकास के लिए पूर्व की वामपंथी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया.

सख़्त कानून की कमी

वामदलों का दावा है कि उनकी सरकार के समय ऐसी चिट फंड कंपनियों पर लगाम कसने के लिए एक सख्त कानून बनाया गया था लेकिन यह अब भी राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए लंबित है.

ममता सरकार अब ऐसे अवैध धंधों पर रोक लगाने के लिए एक अधिसूचना जारी करने पर विचार कर रही है.

सेबी लगातार केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे अवैध धंधों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाने के लिए कहता रहा है.

जब से ऐसी चिट फंड कंपनियों ने अपने पैर पसारने शुरू किए हैं तब से सरकार की लघु बचत योजनाओं में निवेश में भारी कमी आई है.

सेबी ने शारदा समूह के बारे में पहले ही चेतावनी दे दी थी.

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