राजस्थान में खुला माँ के दूध का बैंक

  • 24 अप्रैल 2013
माँ के दूध का बैंक
Image caption उदयपूर में खुला एक अनोखा बैंक

दुर्बल माँ और कमज़ोर सेहत के साथ दुनिया में आए नवजात बच्चे के लिए राजस्थान के उदयपुर में दूध बैंक खोला गया है.

दिव्या मदर मिल्क बैंक के नाम से खुले इस अनोखे बैंक ने शुरुआत में ही माँ का 62 यूनिट यानी लगभग दो लीटर दूध जमा कर लिया.

माँ का ये दूध कुछ धाय माताओं ने बैंक को उपलब्ध कराया है. पच्चीस दिन की एक नन्ही गुड़िया वो पहली नवजात है जिसे एक माँ के आँचल से निकले इस दूध ने अपनी ख़ुराक़ से नवाज़ा है.

एक ग़ैर-सरकारी संगठन 'माँ भगवती विकास संस्थान' के हाथों स्थापित ये दूध बैंक फ़िलहाल उदयपुर के सरकारी पन्ना धाय महिला अस्पताल से चल रहा है.

बैंक ने अपना काम शुरू किया ही था कि देखते ही देखते 62 यूनिट दूध जमा हो गए. बैंक की क्षमता छह लीटर है और अभी दो लीटर से कुछ अधिक माँ का दूध जमा किया जा चुका है.

संगठन के मुताबिक़ ये बैंक राजस्थान और उत्तर भारत का पहला ऐसा बैंक है जहाँ माँ का दूध संकलित किया जाता है और फिर उसे ज़रूरतमंद नवजात शिशुओ को उपलब्ध करवाया जाता है.

कई बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते है और दुनिया में आते ही कोई न कोई बीमारी अपने उन्हें अपने आग़ोश में ले लेती है.

कमज़ोर बच्चों के लिए अमृत

इस बैंक के खोले जाने की ज़रूरत को बयान करते हुए बैंक की संयोजक अर्चना शक्तावत ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, ''भारत में शिशु मृत्यु की हालत चिंताजनक है. आंकड़ों के मुताबिक़ पैदा होने वाले एक हज़ार बच्चो में से 46 बच्चे असमय दम तोड़ देते है. उनके लिए ये दूध राम बाण औषधि है.''

बैंक के आयोजकों का कहना है कि अभी उनकी नज़र उदयपुर सरकारी अस्पतालों के गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती बच्चो पर है. इन बच्चो को ऐसे दूध की बहुत ज़रूरत रहती है.

बैंक की अर्चना शक्तावत के अनुसार बहुतेरे बच्चे और माताएं कुपोषण की शिकार होती हैं और उनको ऐसे दूध से बड़ी मदद मिलती है.

बैंक अधिकारियो के अनुसार एचआईवी पीड़ित महिलाएं जब माँ बनती हैं तो उनके नवजात बच्चों के लिए ये दूध बड़ा मददगार हो सकता है.

नई अवधारणा

बैंक अधिकारियो का कहना है कि माँ के दूध और उसे दूसरों के लिए उपलब्ध करने की अवधारणा भारत में नई है, लिहाज़ा लोगो को समझाना भी पड़ रहा है.

अर्चना शक्तावत कहती है, ''हमारे लोग जगह-जगह जा कर इस बारे में लोगों को प्रेरित कर रहे हैं. कुछ माताएं इसे लेकर शंकित हैं. जाति भी एक मुद्दा है. हम महिलाओं को समझाते है कि जैसे रक्त दान है वैसे ही माँ का दूध दान किया जा सकता है.''

ये बैंक राजस्थान में उस हिस्से में खुला है जहाँ पन्ना धाय ने रियासत काल में चित्तौड़ गढ़ के शाही ख़ानदान के चश्म-ओ-चिराग़ और शिशु उतराधिकारी राजकुमार उदय की जान बचाने के लिए अपने आँचल के लाल को न्योछावर कर दिया था.

इतिहास ने पन्ना धाय को धात्री माँ के रूप में इतने सम्मान से जगह दी कि वो मातृ शक्ति की प्रतीक और परिचायक बन गई.

दूध बैंक उसी अंचल में माँ के आँचल की महत्ता और महानता को फिर से पूजित करना चाहता है. क्योंकि माँ की न तो कोई जाति होती है न धर्म,वो तो हर शिशु के लिए माँ है.

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