कोयला घोटाला: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल हरेन रावल का इस्तीफा

  • 30 अप्रैल 2013
Image caption विवाद इस बात पर है कि सीबीआई ने कोयला घोटाले की स्टेटस रिपोर्ट सरकार से साझा की

कोयला घोटाले पर सीबीआई की रिपोर्ट सरकार से साझा करने पर गलत जानकारी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मांगी गई सफाई के बीच विवाद में फंसे सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल हरेन रावल ने इस्तीफा दे दिया है.

हरेन रावल ने उच्चतम न्यायालय को यह बताकर विवाद उत्पन्न कर दिया था कि कोयला घोटाला में सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट को सरकार के साथ साझा नहीं किया गया था. इस तरह इस मुद्दे पर अपना पद गंवाने वाले वह पहले व्यक्ति हैं.

हरेन रावल का ये इस्तीफा अटॉर्नी जनरल जी. ई. वाहनवती को लिखे पत्र के एक दिन बाद सौंपा है.

समाचार ऐजेंसी पीटीआई के मुताबिक रावल ने केंद्रीय कानून मंत्री अश्वनी कुमार को अपना इस्तीफा सौंपा. उन्होंने कहा,‘मैंने अपना इस्तीफा कानून मंत्री को सौंप दिया है.’

जनरल जी. ई. वाहनवती को लिखे पत्र में उन्होंने कहा था कि उन्हें इस मामले में में उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है. साथ ही उन्होंने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में सीबीआई की जांच रिपोर्ट में शीर्ष कानूनी अधिकारी पर हस्तक्षेप करने का प्रयास करने का आरोप लगाया.

हरेन रावल का कहना था कि उन्हें अपने लिखे गए पत्र पर किसी तरह का कोई अफसोस नहीं है. हरेन रावल ने लिखा था कि छह मार्च को कानून मंत्री के साथ बैठक में वाहनवती भी मौजूद थे, और इसमें स्टेटस रिपोर्ट के मसौदे को साझा किया गया था.

एक सवाल के जवाब में हरेन रावल ने कहा कि वो उन सभी बातों पर डटे हुए हैं जो उन्होंने वाहनवती को लिखीं हैं.

हरेन रावल ने ये भी कहा कि यूपीए सरकार ने उन्हें उनकी नियुक्ति की और इसके लिए वो आभारी है.

अदालत की चिंता

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने कोयला आवंटन में कथित घोटाले की जांच में सरकारी दखल के मामले पर सीबीआई से दोबारा हलफ़नामा दायर करने को भी कहा था.

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या जांच एजेंसी सीबीआई का मैनुअल इसकी इजाज़त देता है कि इस तरह के मसौदे कानून मंत्री के साथ साझा किए जाएं?

अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या कानून मंत्री को इस तरह का कोई अधिकार है?

Image caption न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो को 'राजनितिक आकाओं' से आदेश लेने की ज़रूरत नहीं है.

न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो को 'राजनितिक आकाओं' से आदेश लेने की ज़रूरत नहीं है.

मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा, "हमारी पहली प्राथमिकता है सीबीआई को राजनितिक दखल से मुक्त करना."

अदालत ने कहा, “यह इतना बड़ा विश्वासघात है, जिसने पूरी नींव को हिलाकर रख दिया है.”

कोयला खदान आवंटन घोटाले के सिलसिले में ब्यूरो के निदेशक रंजीत सिन्हा द्वारा दायर हलफनामे पर का संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने ये टिप्पणियां कीं.

रंजीत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की 'स्टेटस रिपोर्ट' के संबंध में एक शपथ पत्र दाखिल किया था.

शपथ पत्र में कहा गया है कि 'स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा क़ानून मंत्री अश्विनी कुमार, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को दिखाया गया था.

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