दिल्ली 84 दंगे: सज्जन कुमार बरी

  • 30 अप्रैल 2013
Image caption सज्जन कुमार को दिल्ली छावनी में पांच सिखों की हत्या के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है. (फा़इल फोटो)

दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली छावनी में पांच सिखों की हत्या के मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

ज़िला और सत्र न्यायाधीश जे आर आर्यन ने मामले के बाकी पांच अभियुक्तों- कैप्टन भागमल, पूर्व विधायक महेंद्र यादव, गिरधारी लाल, कृष्ण खोखर और पूर्व पार्षद बलवंत खोखर, को दोषी करार दिया.

(देखिए 1984 के सिख विरोधी दंगों की तस्वीरें)

सज्जन कुमार पर 1984 दंगों के मामलों में एक और केस लंबित है.

एक अन्य केस में दिल्ली पुलिस ने सज्जन कुमार के खिलाफ़ सबूत नहीं होने की बात करते हुए क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की है.

धरना और जूता

अदालत का आदेश के आने के तुरंत बाद सिख संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार फ़ैसला सुनाने वाले जज पर अदालत में जूता फेंका गया और शिकायतकर्ता जगदीश कौर कोर्टरूम के अंदर ही धरने पर बैठ गईं.

उनका कहना था कि जब तक इंसाफ़ नहीं हो जाता तब तक वह नहीं जाएंगी.

न्यायालय ने बलवान खोखर, गिरधारी लाल, और कैप्टन भागमल को हत्या का दोषी माना और महेंद्र यादव और किशन खोखर को दंगों का दोषी पाया.

अदालत ने इस मामले पर सज़ा की बहस के लिए के लिए 6 मई की तारीख निर्धारित की है.

वर्ष 1984 में 31 अक्टूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सुरक्षा कर्मियों द्वारा हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे.

यह मामला दिल्ली छावनी क्षेत्र में पांच सिखों की हत्या से जुड़ा था.

दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में पांच सिखों केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी.

शिकायतकर्ता और प्रत्यक्षदर्शी जगदीश कौर केहर सिंह की पत्नी और गुरप्रीत सिंह की मां थीं. रघुविंदर, नरेंदर और कुलदीप उनके और मामले के एक अन्य गवाह जगशेर सिंह के भाई थे.

पुलिस की भूमिका

Image caption वर्ष 1984 के सिख दंगों के पीड़ितों को अब भी इंसाफ़ का इंतज़ार है

जस्टिस जीटी नानावती आयोग की सिफ़ारिशों पर साल 2005 में सज्जन कुमार और अन्य अभियुक्तों के खिलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.

सीबीआई ने अभियुक्तों के खिलाफ जनवरी 2010 में दो चार्जशीट दायर की थीं.

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दंगों की जांच की थी.

साल 2005 में केस की जांच सीबीआई के हाथ आई और उसने कोर्ट को बताया कि दंगों में सज्जन और पुलिस के बीच खतरनाक संबंध था.

सीबीआई के अनुसार पुलिस ने चारों तरफ़ हो रही हिंसा के प्रति अपनी आंखें बंद रखी थीं.

सीबीआई का यह भी आरोप था कि शिकायतों के दौरान जहां भी सज्जन कुमार का नाम आया दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड्स से उसे “तुरंत मिटा दिया” गया.

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