'किंग' नहीं तो 'किंग मेकर' होंगे येदियुरप्पा?

कर्नाटक
Image caption येदियुरप्पा अब वोटों में सेंध मारकर भारतीय जनता पार्टी के लिए बढ़ा रहे हैं मुश्किलें

कर्नाटक में 224 में से 223 सीटों के लिए होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी.

चुनावी गर्मी को देर शाम जोरदार बारिश के झोंकों ने ठंडा ज़रूर कर दिया, मगर सबकी नज़रें अब 5 मई पर हैं जब मतदान होगा और पारा एक बार फिर चढ़ जाएगा.

कर्नाटक की राजनीति के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है और यह विधान सभा का चुनाव सबके लिए काफी मायने रखता है.

खास तौर पर ये चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए एक अग्नि परीक्षा जैसा ही है क्योंकि दक्षिण भारत में संगठन का झंडा गाड़ने वाले बी एस येदियुरप्पा ने अब उसके सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.

येदियुरप्पा की बग़ावत से भाजपा पूरी तरह लड़खड़ा चुकी है. येदियुरप्पा की नयी पार्टी - कर्नाटक जन पक्ष ने सभी 224 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को खड़ा किया है.

कर्नाटक के विधान सभा के चुनाव पर इसलिए भी सबकी नज़र है क्योंकि यहाँ सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार ही है. दोनों राष्ट्रीय दल यानी भाजपा और कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे की खूब फजीहत की है.

अवैध उत्खनन और कई ऐसे मुद्दे रहे हैं जिनको लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार को अपना कार्यकाल चलाना मुश्किल साबित हुआ.

येदियुरप्पा की बगावत इसलिए भी संगठन को महंगी पड़ने वाली है क्योंकि वो लिंगायत जाति से आते हैं जिसे सालों तक भाजपा अपना वोट बैंक समझती रही है.

वोट में लगी सेंध

जब भाजपा ने येदियुरप्पा को फिर से मुख्यमंत्री बनाने से इनकार कर दिया तो उन्होंने संगठन को संकेत दे दिया कि 'हम तो डूबे हैं सनम... तुम्हें भी साथ ले डूबेंगे...'

Image caption कर्नाटक के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार (बीच में) भी लिंगायत जाति से ताल्लुक रखते हैं

हालांकि भाजपा के नेता ये मानने को तैयार नहीं हैं और वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर भी लिंगायत जाति से ही आते हैं.

मगर इतना तो तय है कि येदियुरप्पा के जाने से भारतीय जनता पार्टी के इस वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी हो चुकी है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि येदियुरप्पा भले ही खुद इतना वोट नहीं ला पाएं जिनसे वो एक बार फिर मुख्यमंत्री बन सकें मगर वो इस चुनाव में किंग मेकर की भूमिका में ज़रूर नज़र आयेंगे.

वरिष्ट पत्रकार इमरान कुरैशी कहते हैं कि लिंगायत जाति के मतों के विभाजन का नुकसान भारतीय जनता पार्टी को उठाना पड़ेगा जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है.

किसको फायदा

मगर कांग्रेस की अंदरूनी कलह किस हद तक उसे इसका फायदा उठाने देती है ये तो परिणाम के बाद ही पता चल पायेगा. विश्लेषकों को लगता है कि ऐसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं कि जिस येदियुरप्पा के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोला था, कहीं ऐसा न हो कि सरकार बनाने के लिए उसे उनके समर्थन की ज़रुरत आन पड़े.

मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में अगर किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाता है तो पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारास्वामी का जनता दल (सेकुलर) और भाजपा के एक और बागी बी श्रीरामुलु के नेतृत्व वाले बीएसआर कांग्रेस जैसे दलों की भूमिका भी अहम् हो जायेगी.

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