बिहार: खुले में शौच जाना यानी बलात्कार का ख़तरा..

  • 6 मई 2013
Image caption बिहार में शौचालयों के अभाव में महिलाएं खेतों में शौच जाने को मजबूर हैं

बिहार में पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि खुले में शौच जाती महिलाएं बलात्कार का शिकार हो रही हैं.

अधिकारियों के मुताबिक ऐसी घटनाएं या तो सुबह-सवेरे या देर शाम को होती हैं जब महिलाएं और लड़कियां खेतों में शौच के लिए जाती हैं.

एक स्वास्थय संस्था द्वारा किए गए सर्वेक्षण में सामने आया है कि ग्रामीण बिहार में करीब 85 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं है और इनमें से 49 प्रतिशत लोग सुरक्षा कारणों की वजह से अपने घर में शौचालय बनवाना चाहते हैं.

हाल ही में लड़कियों और महिलाओं के साथ ऐसे वक्त में बलात्कार की घटनाएं सामने आई हैं जब वे शौच के लिए खेत जाती हैं.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक इनमें से ज़्यादातर मामलों के बारे में शिकायत दर्ज नहीं करवाई जाती.

कई मामले

गत 28 अप्रैल को बिहार की राजधानी से 35 किलोमीटर दूर कालापुर गांव में शौच के लिए खेत जाती एक जवान लड़की का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया.

पुलिस ने इस मामले में पीड़ित लड़की की शिकायत दर्ज की जिसमें लिखा गया कि एक पीड़िता के साथ जबरन बलात्कार किया गया.

इसी तरह दो हफ्ते पहले 24 अप्रैल के दिन शेखपुरा ज़िला के चौन्निया गांव में एक जवान लड़की के साथ खेत में कथित तौर पर बलात्कार किया गया.

इसी साल जनवरी में राहता-फानन गांव में एक किशोरी के साथ उस वक्त कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया, जब वो शौच के लिए दूर निकल गई थी.

इस पीड़िता की रिपोर्ट में कहा गया कि उनके साथ दुष्कर्म करने वाले दो लड़के, उन्हें पास की एक झोपड़ी में ले गए जहां उनके साथ बलात्कार किया गया.

सरदर्द

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अरविंद पांडे ने बीबीसी को बताया है कि न केवल खुले में शौच जाती महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि बलात्कार के मामले महीने-दर-महीने सामने आ रहे हैं.

एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2012 में करीब 400 महिलाओं और जवान लड़कियों के घरों में अगर शौचालय होता, तो वे बलात्कार का शिकार होने से बच सकती थीं.

बिहार में साल 2012 में 872 मामले दर्ज किए गए और अगर पिछले पांच सालों के आंकड़े देखे जाएं, तो औसतन 980 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं.

खुले में शौच जाने वाली महिलाओं के साथ होने वाले दुष्कर्म से सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक बहुत गुस्से में हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता अनीश अंकुर का कहना है, “मैं ये कहूंगा कि ग्रामीण बिहार में ज़्यादातर बलात्कार उन महिलाओं व लड़कियों के साथ होते हैं जो खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं. इनमें से करीब 40 से 50 प्रतिशत मामले सुबह-सवेरे या शाम के वक्त होते हैं.”

सुरक्षा के लिए शौचालय

अनीश अंकुर का ये भी कहना है कि सामाजिक कलंक के डर से ज़्यादातर मामलों को रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज भी नहीं करवाई जाती.

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीकांत का कहना है, “विश्व में जितने भी लोग खुले में शौच जाते हैं, उनमें से ज़्यादातर भारत में रहते हैं. बिहार इस मामले में अव्वल दर्जे पर है.”

कई वैश्विक स्वास्थय संगठनों की रिपोर्ट में सामने आया है कि बिहार में 85 प्रतिशत ग्रामीण घरानों में शौचालय नहीं है.

रिपोर्ट ये भी कहती है कि जो लोग अपने घरों में शौचालय की सुविधा चाहते हैं, उनमें से 49 प्रतिशत इसलिए ऐसा चाहते हैं क्योंकि वे अपने घर की महिलाओं और लड़कियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण चाहते हैं.

दिलचस्प बात ये है कि इनमें से केवल एक प्रतिशत लोगों ने ही स्वास्थय कारणों की वजह से शौचालय का होना ज़रूरी बताया.

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