क्या था मंजूनाथ की 'आत्महत्या' का सच?

  • 13 मई 2013
Image caption यूपीएससी आईएएस, आईपीएस, आईएफएस समेत अन्य सेवाओं की परीक्षा आयोजित करवाता है.

संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी ने बंगलौर में एक 24 वर्षीय छात्र की कथित आत्महत्या के पीछे सिविल सर्विसेज़ के नतीजों में गलती होने के आरोप से इनकार किया है.

पुलिस ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बंगलौर के श्रीरामपुरा के मंजूनाथ ने शुक्रवार को एक निर्माणाधीन इमारत में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी.

मंजूनाथ कथित तौर पर सिविल सेवा परीक्षा पास करनेवाले छात्रों की सूची में अपने रोल नंबर के साथ किसी और का नाम लिखे जाने से परेशान थे.

पर यूपीएससी का दावा है कि मंजूनाथ प्रारंभिक परीक्षा में भी पास नहीं हुए थे, ऐसे में क्वालिफाई करनेवाले छात्रों की सूची में उनका नाम हो ही नहीं सकता था.

यूपीएससी के आरके गुप्ता ने एक पत्रकार वार्ता कर कहा, “मंजूनाथ को 538950 रोल नंबर दिया गया था और बंगलौर के सेंटर में वो परीक्षा में भी बैठे, लेकिन वे इसमें पास नहीं हो पाए. इस रोल नंबर के किसी छात्र ने मेन्स परीक्षा या इंटरव्यू नहीं दिया.”

रोल नंबर का चक्कर

वहीं पुलिस के मुताबिक मंजूनाथ ने यूपीएससी के अधिकारियों से संपर्क साधकर रोल नंबर में अदाल-बदली के बारे में जानकारी लेने की भी कोशिश की लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला.

यूपीएससी ने ये तो माना कि उनके पास फैक्स के माध्यम से मंजूनाथ के एक दोस्त की एक चिट्ठी आई थी जिसमें कहा गया था कि, सिविल सेवा के नतीजे की सूची में 538745 रोल नंबर के साथ मंजूनाथ की जगह दूसरे व्यक्ति बी अश्विन का नाम लिखा था.

लेकिन यूपीएससी के मुताबिक 538950 रोल नंबर के साथ वीवाय मंजूनाथ ने 2012 की सिविल सेवा की प्राथमिक परीक्षा दी थी.

कमीशन ने कहा कि खुद मंजूनाथ की तरफ से उन्हें कोई पत्र नहीं मिला, "हमारे रिकॉर्ड्स के मुताबिक 538745 रोल नंबर बी अश्विन का ही है, जिन्होंने मेन्स परीक्षा पास की और फिर इंटरव्यू भी."

यूपीएससी आईएएस, आईपीएस, आईएफएस समेत अन्य सेवाओं की परीक्षा आयोजित करवाता है. तीन मई को 2012 की परीक्षा के अंतिम नतीजे घोषित किए गए थे.

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