ब्रितानी बच्ची जो भारत आकर दुनिया से चली गई

  • 16 मई 2013
गुरकिरन कौर
Image caption गुरकिरन ईस्टर की छुट्टियों में भारत आई थी

ब्रिटेन के बर्मिंघम में रहने वाला एक पंजाबी परिवार अपनी आठ वर्षीय बेटी की मौत की वजह जानना चाहता है.

गुरकिरन कौर लोयल मार्च में छुट्टी पर भारत गई थी कि वहां उसके शरीर में पानी की कमी हो गई. पंजाब में स्थानीय डॉक्टर के पास ले जाने पर उसे एक इंजेक्शन दिया गया जिसके बाद उसकी मौत हो गई.

जब उसके शव को वापस इंग्लैंड भेजा गया तो उसके कुछ अंग गायब थे और इसीलिए ब्रितानी डॉक्टर उसके पोस्ट-मॉर्टम परीक्षण नहीं कर पाए.

बर्मिंघम शव परीक्षण ऑफिस ने बच्ची के अंग वापस किए जाने का आग्रह किया है.

गुरकिरन के माता पिता का कहना है कि वो स्थानीय डॉक्टर के इंजेक्शन से तुरंत बीमार पड़ गई थी. अस्पताल ले जाने पर पता चला कि वहां पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई थी.

गुरकिरन की मां अमृत कौर लोयल का कहना है कि जब वो डॉक्टर गुरकिरन को इंजेक्शन लगाने वाला था तो उन्होंने पूछा था कि इसमें क्या है. लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया था.

'और वो चली गई'

वो बताती हैं, “जैसे ही उसने इंजेक्शन लगाया, उसकी गर्दन पीछे की तरफ ढलक गई. उसकी बायीं बाजु झुक गई और वो सफेद पड़ गई. उसने दो बार अपनी आंखें झपकाईं, मुंह खोला और वो चली गई.”

बर्मिंघम के हॉकले में रहने वाले इस परिवार का कहना है कि उन्हें सिर्फ इंजेक्शन के ब्यौरे के नाम पर एक कागज दिया गया जिस पर लिखे को पढ़ना भी आसान नहीं है.

Image caption संतोख सिंह लोयल और अमृत कौर लोयल नहीं जानते कि उनकी बेटी के साथ क्या हुआ

अब भी उन्हें अपनी बेटी के भारत में हुए पोस्ट मॉर्टम की रिपोर्ट का इंतजार है. उनके मुताबिक ये बात जानकर उन्हें धक्का लगा कि बच्ची के कई अंग भी गायब थे.

बर्मिंघम के शव परीक्षण कार्यालय की प्रवक्ता का कहना है कि गुरकिरन के शरीर पर पर्याप्त मात्रा में ऐसे पदार्थ नहीं हैं जिनसे ये पता लगाया जा सके कि भारत में क्या हुआ था.

प्रवक्ता ने कहा कि गुरकिरन के मामले में जांच शुरू की गई है ताकि उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए परिवार को दिया जा सके.

ब्रिटेन में इस परिवार की डॉक्टर शबाना महमूद ने सरकार से आग्रह किया है कि वो भारत सरकार पर दबाव डालकर बच्ची की मौत के कारणों का पता लगवाए.

ब्रितानी विदेश विभाग ने अपने एक बयान में कहा है कि इस बात की पुष्टि की जाती है कि एक ब्रितानी नागरिक की 2 अप्रैल को मौत हो गई थी.

बयान के अनुसार पीड़ित परिवार को कॉन्सुलर सेवा मुहैया कराई गई थी और अन्य किसी तरह की मदद उन्होंने नहीं मांगी थी.

भारतीय उच्चायोग ने इस मामले पर कुछ नहीं कहा है.

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