जेसिका कांड: मुंशी पर झूठी गवाही का मुक़दमा

Image caption जेसिका लाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने जेसिका लाल हत्याकांड के मामले की सुनवाई के दौरान अपने बयान से मुकरने वाले मॉडल शायन मुंशी और एफ़एसएल अधिकारी प्रेम सागर मनोचा पर केस चलाने का फैसला किया है.

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति जीपी मित्तल की पीठ ने इस मामले में बाकी 17 लोगों पर मुकदमा नहीं चलाने का फ़ैसला किया.

अदालत ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था और अभियोजन पक्ष से सवाल किया था कि सभी गवाहों ने सुनवाई के दौरान अपने रवैए में बदलाव कैसे किया.

अदालत ने 4 मई, 2011 को पुलिस और बयान से मुकरने के मामले में गवाहों की ओर से जिरह सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख दिया था.

हो सकती है जेल

जेसिका लाल की 29 अप्रैल 1999 को गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में हरियाणा कांग्रेस के नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा को दोषी ठहराया गया था.

आरोप था कि सोशलाइट बीना रमानी की एक पार्टी में जेसिका ने काफी कहने के बाद भी मनु शर्मा को शराब परोसने से मना कर दिया था.

अप्रैल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने मनु शर्मा के दोष और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा और उसे जेल भेज दिया था.

शायन मुंशी इस मामले का शिकायतकर्ता और सबसे अहम प्रत्यक्षदर्शी गवाह था. शायन जेसिका की हत्या के समय उनके पास खड़े थे और पुलिस की मानें तो उन्होंने हत्यारे को काफी करीब से देखा था. लेकिन अदालत में वे अपने बयान से मुकर गए थे.

उनका कहना था कि उन्हें हिंदी ही नहीं आती और उन्होंने पुलिस को कोई बयान भी नहीं दिया था. शायन मुंशी ने कोलकाता के डॉन बास्को स्कूल से पढ़ाई की थी और वहां के रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने आठवीं कक्षा तक हिंदी भाषा पढ़ी है.

अदालत ने माना कि बाकी गवाहों के खिलाफ़ मामला दर्ज करने लायक आधार नहीं है. लेकिन शिकायतकर्ता शायन मुंशी और फ़ोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला के अधिकारी प्रेम सागर मनोचा का ग़लत बयान केस की दिशा मोड़ सकता था.

अगर अदालत में झूठ बोला जाना साबित हो जाता है तो दोनों जेल जा सकते हैं.

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