'जब मैं पहुंचा तो चारों तरफ़ लाशें बिखरी थीं'

  • 26 मई 2013
Image caption हमले में घायल लोगों को जगदलपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है

जब हम वहां पहुंचे तो घटनास्थल से दो किमी पहले ही एक पेड़ गिराकर रास्ता जाम किया गया था ताकि अगले दिन भी कोई वहां जल्दी आ न सके. हम लोग जगदलपुर से कार से चले थे लेकिन बाद में हमें वहां मोटरसाइकिल से ही जाना पड़ा.

घटनास्थल पर पहुंचने पर हमें एक बड़ा गड्ढा दिखाई दिया जहां विस्फोट किया गया था.

उसके आस-पास ही तमाम कांग्रेसी नेताओं की गाड़ियां दिखीं और फिर करीब सौ मीटर की ही दूरी पर जगह-जगह लाशें पड़ी दिखीं. इन लाशों में कुछ कांग्रेसी नेताओं की थीं कुछ सुरक्षा बल के जवानों की थीं.

इनमें से कुछ नेताओं को हम पहचान रहे थे कुछ को नहीं पहचान पाए.

सबसे आखिर में हमें विद्या चरण शुक्ल जी दिखाई दिए. घायल अवस्था में वो पड़े हुए थे. हमें देखकर उन्होंने मदद मांगी. हम लोगों ने उन्हें टिकाकर खड़ा किया.

कई लोगों को हमने पानी दिया, जो भी मदद हम कर सकते थे, हमने किया.

समर्पण

यात्रा में शामिल कुछ नेताओं ने हमें बताया कि पहले तो सुरक्षा बल के जवानों ने माओवादियों का मुक़ाबला किया लेकिन जब उनकी गोलियां ख़त्म हो गईं तो माओवादियों ने उनसे समर्पण करने को कहा.

उसके बाद बहुत से कांग्रेसियों ने समर्पण किया. फिर माओवादियों ने नेताओं के नाम पूछ-पूछ कर उन्हें बंधक बनाया. महेंद्र कर्मा को पहचान कर उन लोगों ने उनकी सबके सामने पिटाई की और बहुत ही वीभत्स तरीके से उन पर हमले किए गए.

महेंद्र कर्मा की कांग्रेसी नेताओं के सामने ही माओवादियों ने हत्या कर दी. हम लोग जब वहां पहुंचे तब तक अँधेरा हो चुका था, लेकिन महेंद्र कर्मा के पास ही घायल एक व्यक्ति ने हमें बताया कि ये शव महेंद्र कर्मा का ही है.

पहाड़ और सघन जंगल वाला ये इलाका बहुत ही दुर्गम है, इसीलिए पुलिस को भी यहां पहुंचने में काफी समय लग गया.

कांग्रेसी नेता कवासी लखमा हमारी मोटर बाइक लेकर ही वहां से भाग निकले, इसलिए हमें पैदल ही वापस आना पड़ा. हमारे साथ कई कांग्रेसी भी वापस जगदलपुर आए.

(बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत पर आधारित)

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