'चीनी पाउडर' से घायल हुए भारतीय मज़दूर

Image caption विक्रम की एक आंख चीनी रसायन से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है

कल तक उनकी आंखों में भविष्य के सुन्दर सपनों का समन्दर हिलोरे मारता था, लेकिन अब उन्हीं आंखों में अंधेरा उतर आया है.

कोटा की पत्थर खदानों में इस्तेमाल किए जा रहे एक चीनी रसायन ने चार मजदूरों की आंखों की रौशनी छीन ली.

जवान उम्र में आंखों की रौशनी खो चुके ये मज़दूर कोटा के एक अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं.

उधर कोटा प्रसाशन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं.

इन मजदूरों में से एक विक्रम सिंह आगामी 20 जून को परिणय सूत्र में बंधने वाले थे.

डॉक्टरो के मुताबिक विक्रम की एक आंख का कॉर्निया पूरी तरह खराब हो गया है. इससे चेहरे पर विकृति भी आ गई है क्योंकि क्षतिग्रस्त आंख का आकार छोटा हो गया है.

विक्रम के साथ कोटा ज़िले के ही राजेश नामां, मदन सिंह और अब्दुल सलीम की आंखें भी बेनूर गई है.

सदमे में मज़दूर

डॉक्टरो के अनुसार राजेश और मदन सिंह की दोनों आंखें अब दुनिया नहीं देख सकेंगी जबकि अब्दुल सलीम और विक्रम को एक-एक आंख की रौशनी गंवानी पड़ी है.

ये घटना तब सामने आई जब एक पीड़ित मज़दूर को दिखाई देना बंद हो गया और वे कोटा के सुवि नेत्र चिकित्सालय चेकअप के लिए पहुंचे.

इसके बाद दूसरे और मज़दूरों को भी आंखों में ऐसी ही शिकायत हुई.

अस्पताल के डॉक्टर सुरेश पाण्डेय ने बीबीसी को बताया, “किसी रसायन से इनकी आंखों को भारी नुकसान पहुंचा है. इन मज़दूरों ने उस रसायन का एक नमूना भी मुझे दिखाया है. ये रसायन चीन में बना हुआ है और पत्थर की खदानों में विस्फोटक की जगह इस्तेमाल किया जाने लगा है. ऐसा प्रतीत होता है कि इस रसायन के इस्तेमाल के साथ इसमें निहित खतरों के बारे में मज़दूरों को कुछ बताया नहीं गया है.”

उन्होंने कहा कि वे इन मज़दूरों की आंखों की रौशनी वापस लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इनकी आंखों की रौशनी लौटना मुश्किल है.

घटना के बाद से प्रभावित मजदूर सदमे में आ गए हैं क्योंकि ये इतने ग़रीब हैं कि इलाज के लिए इनके पास पैसा भी नहीं है.

इन मज़दूरों का कहना है कि खदान के मालिकों को जब इनकी हालत के बारे में पता चला, तो उन्होंने भी कोई मदद नहीं की.

विस्फोटक बनाम चीनी रसायन

जानकारी के मुताबिक कोटा के ग्रामीण क्षेत्रो में बड़े पैमाने पर खनन होता है.

कुछ समय पहले तक सख्त चट्टानों को तोड़ कर पत्थर निकालने के लिए विस्फोटक इस्तेमाल किए जाते थे, मगर हाल में चीन में बने रासायनिक पाउडर का इस्तेमाल होने लगा है.

इसे पानी में मिला कर एक घोल बनाया जाता है और फिर उसे चट्टान में सुराख़ कर भीतर डाल दिया जाता है.

इससे चट्टान में दरारें आ जाती हैं और फिर पत्थर निकाले जाते है.

मज़दूरो ने अस्पताल में डॉक्टरों को बताया कि जैसे ही इस रसायन के कण उनकी आंखों तक पहुंचे, उन्हें दिखाई देना बंद हो गया.

इन मजदूरों की उम्र 20 से 25 पचीस साल की है. ये जीवन का वो पड़ाव है जब हर किसी की आंखों में ख्वाबों का बसेरा होता है, लेकिन इनकी आंखों से सपनों के साथ-साथ अब रौशनी भी काफूर हो गई है.

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