क़ानून जो छीन रहा है लोगों की रोटी

  • 31 मई 2013
Image caption खाड़ी से बेरोजगार होकर लौटे चंद्रन अपने परिवार के साथ.

सऊदी अरब में तकरीबन 20 लाख भारतीय काम करते हैं और इनमें से एक बड़ा तबका ऐसा है जो छोटे मोटे काम करने वाले श्रमिकों की श्रेणी में आता हैं.

लेकिन अब सऊदी अरब ने अपने देश में नए श्रम क़ानून को लागू कर दिया है.

नए 'निताकत क़ानून ' यानी कि श्रम क़ानून के मुताबिक सऊदी अरब से संचालित हर कंपनी में कम से कम 10 प्रतिशत कर्मचारी स्थानीय नागरिक होने चाहिए.

इस नए क़ानून के चलते कई भारतीयों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ रहा है.

सऊदी अरब की सरकार ने नए काननों को कड़ाई से लागू करना शुरू कर दिया है जिसकी वजह से हज़ारों की तादाद में भारतीय नागरिक सऊदी अरब से निकलकर वापस आने को मजबूर हो रहे हैं.

चंद्रन की कहानी

Image caption सऊदी अरब के नए कानून का सीधा असर केरल की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है.

केरल के मालाबार के इलाके में रहने वाले चंद्रन बीस सालों तक रियाद में वेल्डर का काम करते थे. मगर अब वो बेरोज़गार हैं.

नए क़ानून के लागू होने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया है. चंद्रन को मलाल है कि अपनी इकलौती बेटी के भविष्य के लिए कुछ भी जोड़ नहीं पाए हैं.

केरल के मलाबार के तट पर पिछले कुछ महीनों से ऐसी कहानियों का सैलाब सा आ गया है.

चंद्रन रोज़ रोज़गार की तलाश में निकलते हैं. मगर उन्हें अपने जिले मल्लापुरम में काम नहीं मिल रहा है. चंद्रन का तनाव बढ़ता जा रहा है.

बीबीसी से बात करते हुए चंद्रन कहते हैं, "मैं बीस सालों से सऊदी अरब में काम कर रहा था. मुझे अब वापस भेज दिया गया है. मेरे पास न तो घर है और न पूँजी. यहाँ मेरी बीवी और बेटी किराए के मकान में रहते हैं. मैं अब बेरोज़गार हूँ. यहाँ काम करने की कोशिश की, मगर काम नहीं मिल रहा है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि अब क्या करूं."

जिम्मेदारी किसकी?

Image caption अब्दुल केरल में नई नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं.

लेकिन लौटना उतना आसान भी नहीं है क्योंकि सऊदी अरब में काम कर रहे कई भारतीयों के पास वैध वीज़ा नहीं है.

सऊदी सरकार ने भारतीय कामगारों को तीन जुलाई तक देश छोड़ने को कहा है.

इस अवधि के बाद जो लोग वहां काम करते पाए जाएंगे, उन्हें जेल भेज दिया जाएगा.

मलयाली अख़बारों के स्तम्भकार सीके अब्दुल अज़ीज़ कहते हैं, "भारत सरकार और सऊदी अरब में मौजूद भारतीय उच्चायोग ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाए हुए है."

वो कहते हैं, "कौन वहां काम कर रहे भारतीय कामगारों के लिए जवाबदेह है ? ज़ाहिर है इन हमारी सरकार. मगर वो अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं. कई कामगारों को सही वीज़ा नहीं होने की वजह से जेल में डाल दिया गया है. मगर वो अब वहां से वापस कैसे लौटेंगे. उनके टिकट कौन देगा. इस बात पर भारत सरकार ने अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है."

सऊदी सरकार की चेकिंग

Image caption सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रवक्ता खादर के मुताबिक सरकार इस दिशा में कोशिश कर रही है.

मल्लाप्पुरम के ही रहने वाले अब्दुल रज्ज़ाक भी मदीना के एक अस्पताल में एक्स-रे टेक्नीशियन थे. अब उनकी जगह सऊदी नागरिक ने ले ली है.

उन्हें भी 15 सालों की नौकरी के बाद अचानक भारत वापस भेज दिया गया है.

पन्नीगंगरा गाँव में अपने पिता के घर पर वो इस सोच में डूबे रहते हैं कि अब वो क्या करेंगे. केरल में रोज़गार के ज्यादा अवसर नहीं हैं.

बातों बातों में वो कहते हैं, "वहां सऊदी सरकार की जाँच चल रही है. सब काम करने वाले लोगों के लाइसेंस चेक किये जा रहे हैं. हमारे पदों पर सऊदी नागरिकों को रख लिया गया है. अब यहाँ मैं नौकरी ढूंढ रहा हूँ मगर ये उतना भी आसान नहीं है. मेरे पास ज्यादा पैसे जमा नहीं हैं. परिवार के सारे लोग बहुत उदास है क्योंकि मैं वापस आ गया हूँ."

रज्ज़ाक का कहना है कि उन्होंने वापस लौटकर अपने जिले के कई अस्पतालों में आवेदन दिया है. मगर कहीं से उन्हें कोई बुलावा नहीं आया है.

सरकारी की परेशानियां

सऊदी अरब से अब तक सात हज़ार लोग वापस भेजे भी जा चुके हैं. जिनमे से सबसे ज्यादा मालाबार के इलाके के लोग हैं.

देश के दूसरे राज्य मसलन बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी सऊदी अरब से कामगारों के लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है.

बड़ी तादाद में कामगारों की वापसी ने केरल की सरकार की परेशानियां बढ़ा दी हैं.

राज्य सरकार का दावा है कि वो वापस लौटे कामगारों की मदद की हर मुमकिन कोशिश कर रही है.

केरल की यूडीएफ़ गठबंधन के प्रवक्ता केएनए ख़ादर मानते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर सऊदी अरब से कामगारों की वापसी ने राज्य के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है.

सरकार के सामने उससे बड़ी चिंता है कि श्रम क़ानून के उल्लंघन के आरोप में सऊदी अरब की जेलों में भरे जा रहे भारतीय कामगार.

खादर का कहना है, "ये मामला काफी गंभीर है. जिन लोगों को जेल में भरा जा रहा है, उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है. सिर्फ वीज़ा की शर्तों का उल्लंघन हुआ है. केरल की सरकार ऐसे कामगारों की रिहाई के लिए सऊदी अरब पर दबाव डाल रही है."

केरल के एक बड़े इलाक़े की अर्थव्यवस्था खाड़ी में नौकरियों पर निर्भर है.

इस राज्य में हज़ारों लोगों का सपना अरब सागर के उस पार जाकर पैसे कमाने का होता है लेकिन सऊदी अरब के नए निताकात क़ानून के बाद अब ये ख़्वाब बिखरता हुआ नज़र आ रहा है.

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